भारत की ओर से आयातित चाय पर गुणवत्ता जांच और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया सख्त किए जाने के बाद नेपाल का चाय उद्योग दबाव में आ गया। सीमा पर माल अटकने, जांच में देरी और लागत बढ़ने से कई फैक्ट्रियों की रफ्तार प्रभावित हुई। उद्योग से जुड़े संगठनों ने दावा किया कि उत्पादन प्रभावित होने से कारोबार और रोजगार दोनों पर असर पड़ा और सरकार से समाधान की मांग की गई।
हालांकि बाद में भारत ने राहत देते हुए जोखिम आधारित जांच प्रणाली लागू की, जिसके तहत हर खेप की जांच के बजाय केवल चुनिंदा खेपों की जांच का प्रावधान किया गया। इससे नेपाल के चाय कारोबार को राहत की उम्मीद जगी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखाया कि भारत और नेपाल के आर्थिक रिश्ते कितने गहरे हैं और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संतुलन कितना महत्वपूर्ण है।