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NCP New Chief Sunetra Pawar: सुनेत्रा पवार बनीं NCP की नई राष्ट्रीय अध्यक्ष, सर्वसम्मति से हुआ चुनाव

Fri, 27 Feb 2026 04:45 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो टीम/ अमर उजाला डॉट कॉम

महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत सुनेत्रा पवार को नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्वसम्मति से चुन लिया गया है, जिसे पार्टी के भीतर संगठनात्मक एकजुटता और नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और वरिष्ठ नेताओं की बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया, जिसका सभी सदस्यों ने समर्थन किया और बिना किसी विरोध के उन्हें शीर्ष पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई। इस चयन को एनसीपी के पुनर्गठन और राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि हाल के वर्षों में पार्टी को आंतरिक चुनौतियों, गुटबाजी और चुनावी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा है।

 सुनेत्रा पवार ने अध्यक्ष चुने जाने के बाद अपने संबोधन में कहा कि वह संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा पार्टी की विचारधारा को देशभर में प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एनसीपी सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के अपने मूल सिद्धांतों पर कायम रहेगी और आने वाले चुनावों में मजबूती से भाग लेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके नेतृत्व में पार्टी नई रणनीति के साथ राज्यों में संगठन विस्तार, गठबंधन राजनीति और जनसंपर्क अभियानों पर विशेष ध्यान दे सकती है। सर्वसम्मति से हुआ यह चुनाव यह भी दर्शाता है कि पार्टी नेतृत्व फिलहाल एकजुटता का संदेश देना चाहता है और किसी प्रकार के आंतरिक मतभेद को सार्वजनिक रूप से उभरने नहीं देना चाहता। 

सुनेत्रा पवार की संगठनात्मक भूमिका पहले भी सक्रिय रही है और उन्हें पार्टी के कार्यक्रमों, महिला मोर्चा तथा सामाजिक अभियानों में भागीदारी के लिए जाना जाता है, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय स्थापित करने में सक्षम होंगी। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी की खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाना, कार्यकर्ताओं में उत्साह भरना और विपक्षी दलों के साथ रणनीतिक तालमेल बनाना होगा। कुल मिलाकर, उनका राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना एनसीपी के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है, जिसमें संगठनात्मक पुनर्संरचना, वैचारिक स्पष्टता और चुनावी मजबूती पर विशेष फोकस रहने की संभावना है।

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