सौहार्द के मामले में बरेली पीछे नहीं है। यहां अगर हिन्दू होली खेलता है तो मुसलमान रंग उपलब्ध कराते हैं। जी हां! बरेली में करीब चार से पांच कारोबारी ही हैं जो थोक में होली के रंग और पिचकारी का काम करते हैं। इसमें दो दुकानदार मुसलमान हैं। चौक बाजार में इस्लाम और उनके दो भाई पिछले 50 साल से अपना पुश्तैनी काम कर रहे हैं। होली और दिवाली में भी ये त्यौहार से जुड़े सामान बेचते हैं। इसी तरह सिविल लाइन्स में नसीम पिछले 30 साल से रंग का काम कर रहे हैं। ये होली भी खेलते हैं।