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बरेली में मौलाना तौकीर रजा खान ने जारी वीडियो में कही भड़काऊ बातें

Sat, 27 Sep 2025 12:02 PM IST
आदर्श अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

बरेली शहर शुक्रवार को हिंसा की आग में झुलस उठा। सवाल उठ रहा है क्या यह महज इत्तेफाक था या सुनियोजित साजिश? इत्तेहाद-ए-मिल्लत कौंसिल (आईएमसी) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां के बुलावे पर जुटी भीड़ अचानक बेकाबू हो गई और शहर के कई इलाकों में दुकानों, वाहनों और पुलिस पर हमला बोल दिया।

शुक्रवार रात करीब 10:20 बजे मौलाना तौकीर रजा ने एक वीडियो जारी कर सनसनी फैला दी। उन्होंने कहा, “अतीक और अशरफ की तरह मुझे भी गोली मार दो, मोहम्मद के नाम पर मरना मंजूर है।” मौलाना ने खुद को अब भी नजरबंद बताया और कहा कि प्रशासन उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने से रोक रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके नाम से फर्जी लेटरपैड जारी कर लोगों को गुमराह किया गया। मौलाना ने साफ कहा कि मुसलमान मोहम्मद साहब के नाम पर कानून चाहते हैं और एकतरफा कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

शुक्रवार दोपहर तीन बजे के बाद हालात बिगड़ने लगे। इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान की ओर भीड़ मार्च करने लगी, लेकिन खलील स्कूल तिराहे पर पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद नारेबाजी, पथराव और तोड़फोड़ शुरू हो गई। दुकानों के शीशे टूट गए, बाइकें पलट दी गईं और वाहनों में आगजनी की कोशिश हुई।
डीआईजी अजय कुमार साहनी ने बताया कि उपद्रव में 22 पुलिसकर्मी घायल हुए। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने और लाठीचार्ज करना पड़ा।

हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस को कई इलाकों में तैनात किया गया। श्यामगंज में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव और फायरिंग तक कर दी। जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
नावल्टी चौराहा पर भी उपद्रवियों ने तोड़फोड़ की। यहां पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए भीड़ को खदेड़ा। शहर के बिहारीपुर, कुतुबखाना, इस्लामिया मार्केट, साहूकारा और पुराना बस अड्डा जैसे कई इलाकों में हालात तनावपूर्ण बने रहे।

डीआईजी अजय साहनी ने शाम पांच बजे के बाद स्थिति नियंत्रण में आने का दावा किया। पुलिस ने 30 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा कि बरेली में अब शांति है। किसी भी अप्रिय घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि तस्वीरों और वीडियो में जगह-जगह बिखरे पत्थर, टूटे शीशे और बर्बाद दुकानें साफ गवाही दे रही थीं कि शहर ने बड़ा तनाव झेला।

मौलाना ने 19 सितंबर को ऐलान किया था कि शुक्रवार को इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान में प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। गुरुवार रात पुलिस ने आईएमसी का पत्र जारी कर कार्यक्रम स्थगित होने की जानकारी दी थी, लेकिन शुक्रवार सुबह मौलाना ने वीडियो जारी कर पत्र को फर्जी बताया और कार्यक्रम जारी रखने का ऐलान किया।
इसी बीच, जब लोग मैदान में जमा हुए तो मौलाना खुद नजर नहीं आए। उनके न आने से भीड़ भड़क गई और फिर उपद्रव शुरू हो गया।

पुलिस मौलाना तौकीर रजा और उनके सहयोगियों पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी में है। प्रशासन का मानना है कि भीड़ को भड़काने में उनका सीधा हाथ हो सकता है।
हालांकि मौलाना अपने बयान में कहते हैं कि उन्होंने हमेशा अमन का रास्ता चुना है, लेकिन उनके नजरबंद होने से प्रदर्शन हिंसक हो गया।

बरेली की सड़कों पर शुक्रवार का दिन दहशत और तनाव में बीता। पुलिस और भीड़ के बीच हुई इस भिड़ंत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं क्या प्रशासन समय रहते हालात पर काबू पा सकता था? क्या मौलाना का नजरबंद होना सही कदम था? और क्या धार्मिक भावनाओं के नाम पर उपद्रव का यह सिलसिला थमेगा?
फिलहाल, शहर में पुलिस का पहरा है और लोग घरों में सुकून तलाश रहे हैं, लेकिन बरेली की फिजा में बेचैनी अभी भी बाकी है।

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