यमुना के तेजी से बढ़ते जलस्तर ने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। 1978 में आई बाढ़ के बाद पहली बार यमुना इतने रौद्र रूप में हैं। 2023 में आई बाढ़ का रिकार्ड तो पहले ही टूट गया, वर्ष 2010 में यमुना में आई बाढ़ से भी अधिक पानी इस बार सड़कों पर आ गया है। सोमवार सुबह जलस्तर खतरे के निशान 166 मीटर को पार कर 166.67 मीटर पहुंच गया। यमुना किनारे के बाजारों में पानी आने से स्थिति बिगड़ गई। सोमवार को दोपहर में जलस्तर कई घंटे तक 167.64 मीटर पर स्थिर रहा।भगवान श्री कृष्ण की नगरी में यमुना नदी अपने रुद्र रुप में नजर आ रही है. हालात इतने भयावह हो गए हैं कि लोगों को 1978 की बाढ़ की याद आने लगी है. 47 साल का पुराना रिकार्ड टूटता नजर आ रहा है. हथिनी कुंड बैराज और ताजे वाला बांध से पानी लाखो कियूसिक छोड़ा गया है जिसके कारण यमुना नदी खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर बह रही हैं. जिले के तीस से अधिक गांव बाढ़ के पानी में डूब गए हैं. वहीं यमुना का पानी शहरी क्षेत्रों में भी घुसने लगा है. शहर के विश्राम घाट सहित 20 घाट जलमग्न है. वृंदावन का परिक्रमा मार्ग चीर घाट कुंभ स्थल क्षेत्र पीपल वाला हनुमान जी और बांके बिहारी मंदिर के नजदीक पानी पहुंचने लगा है.
खतरे के निशान से साढ़े चार फीट ऊपर बह रही यमुना
रविवार रात यमुना का जलस्तर 167.50 मीटर था। रातभर में यमुना के जलस्तर में 17 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई। इसका असर यमुना की खादर एवं तटवर्ती क्षेत्र में पानी का स्तर और बढ़ गया। मथुरा जोन में स्वामी घाट को पार कर यमुना का पानी बाजार मार्ग तक पहुंच गया। विश्राम घाट में पानी भरा हुआ है, यहां जाने वाले मार्ग लबालब हैं। बंगाली घाट पार कर पानी बाजार मार्ग पर भी पानी के स्तर में एक फीट की वृद्धि हो गई। ये मार्ग पहले से ही बंद चल रहा है।रविवार को यमुना का पानी सदर क्षेत्र की गलियों में भर गया। यहां के अशोक विहार, जमुना पार रोड, महादेव घाट रोड पर सुबह चार फीट तक पानी और बढ़ गया, इससे आवागमन में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यमुना की खादर टापू बनी हुई है। यहां बने सैकड़ों मकान पानी में डूबे हुए हैं। लोगों का आवागमन जलभराव वाले क्षेत्र में बाधित बना हुआ है। यहां भी हालात और विकराल हो गए।
ट्रैक्टर और नाव से निकाले जा रहे बाढ़ पीड़ित, दिन भर स्थिर रहा जलस्तर
खादर क्षेत्र के जयसिंहपुरा, गणेश टीला, भक्ति धाम कालोनी समेत कई क्षेत्र के लोग राहत शिविर एवं किराए के मकानों में रह रहे हैं। ड्रेन का पानी नाले के जरिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पर पहुंच रहा है। लेकिन, इन दिनों नाला ओवरफ्लो होने के कारण ये पानी सीधे यमुना में जा रहा है, जो वापसी मार रहा है। मसानी से हाईवे लिंक मार्ग पर कई मीटर कल्याणं करोति नेत्र चिकित्सालय तक पानी भर जाने से प्रभावित हो गया है।उधर,यमुना के रौद्र रूप ने वृंदावन की खादर की दो दर्जन कालोनी में जहां बाढ़ से हालात बदतर हो गए हैं। ज्ञानगुदड़ी, राधाबाग, रामानुज नगर, दुर्गापुरम, रतनछतरी, चीरघाट क्षेत्र, शाहजी मंदिर क्षेत्र, जंगलकट्टी, दाऊजी तिराहा क्षेत्र में पानी दो से चार फीट पानी भर गया है।
गौरानगर मार्ग पर नाव चल रही
टटिया स्थान मार्ग, ज्ञानगुदड़ी क्षेत्र के मकानों और आश्रमों के अंदर भी दो से तीन फीट पानी भर गया है। पानीघाट तिराहा से गौरानगर मार्ग पर नाव चल रही है। रामानुज नगर में दो से तीन फीट पानी भरा है। कात्यायनी देवी मंदिर की पीछे की दो सौ मीटर की पुरानी दीवार यमुना के पानी के दबाव के ढह गई। वृंदावन में ही 28 ट्रांसफारमर से बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है। इससे सैकड़ों घर अंधेरे में हैं।