महाराष्ट्र में शिंदे सरकार में शामिल होने और चाचा शरद पवार से अलग होने के बाद अजित पवार ने एनसीपी पर अपना दावा ठोंका था, जिसके बाद से यह पूरा मामला चुनाव आयोग पहुंचा हुआ था और करीब छह महीने से अधिक समय तक चली 10 से ज्यादा सुनवाई के बाद चुनाव आयोग ने अजित पवार गुट के समर्थन में फैसला सुनाया।