लोकतंत्र के नाम पर अलग-अलग वक्त पर होने वाली तमाम राजनीतिक बहसों से परे निकलकर देखें तो अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने एक भाषण में लोकतंक का बेहद सुंदर उधारण पेश किया था। उन्होंने बताया था कि कैसे नेता प्रतिपक्ष होने के बावजूद भी उन्हें सरकार की ओर से जेनेवा में सरकार का पक्ष रखने के लिए भेजा गया।