Jagdeep Dhankhar Resigns: जगदीप धनखड़ ने सोमवार को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने उनके इस कदम पर सवाल उठाए हैं और कहा कि 'स्वास्थ्य कारणों से कहीं ज्यादा गंभीर वजहें' इस इस्तीफे के पीछे हैं। उन्हीं वजहों को लेकर इस चर्चा में विस्तार से बात की गई है। आपको बता दें कि जगदीप धनखड़ ने सोमवार शाम 21 जुलाई को उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था।
उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंपा था। उन्होंने यह इस्तीफा अनुच्छेद 67 (ए) का हवाला देते हुए दिया था। इस्तीफे में उन्होंने पीएम मोदी और अन्य सांसदों का भी शुक्रिया अदा किया था। हालांकि, जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई। किसी ने इसे जाट समुदाय का अपमान बताया तो किसी ने इसे मोदी सरकार की तानाशाही। लेकिन इसके बावजूद भी अटकलों का बाजार गरम है। तमाम राजनीतिक जानकर अपने- अपने दावे वजहों को बता रहे हैं। इसी लिहाज से चर्चा में कुछ बातों पर गौर किया गया है कि हो सकता है कि इन वजहों के कारण उन्होंने यह इस्तीफा दिया हो।
धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल से पूरी की और इसके बाद चित्तौड़गढ़ सैनिक स्कूल में पढ़ाई की। उनका चयन नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में भी हुआ था, लेकिन उन्होंने वहां जाने का विकल्प नहीं चुना। पेशे से वह सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता भी रहे। अपने कार्यकाल के दौरान जगदीप धनखड़ ने संसद सर्वोच्चता के सिद्धांत को जोर-शोर से उठाया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ‘मौलिक संरचना सिद्धांत’ (Basic Structure Doctrine) पर भी सवाल खड़े किए। कोलेजियम व्यवस्था पर उनकी तीखी टिप्पणियों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी कड़ी प्रतिक्रियाएं दीं। हाल ही में उन्होंने राष्ट्रपति और राज्यपालों को विधेयकों पर कार्रवाई के लिए समयसीमा तय करने वाले फैसले का खुलकर विरोध किया और अनुच्छेद 142 को ‘न्यायिक परमाणु मिसाइल’ कहकर संबोधित किया।