क्या NDA में एक नई बगावत की आहट है? वीडियो की शुरुआत में ही मैंने यह सवाल क्यों खड़ा कर दिया ये आपके भी जहन में आ रहा होगा अगर नहीं तो शायद आप भी रूबरू होंगे बिहार की सियासत में चल रहे हालिया घटनाक्रम से। अकसर इंडिया गठबंधन या कहें तो महागठबंधन की जो नीव है वो डोलती हुई नजर आती है लेकिन इस बार मामला उलट है। सुर्खियों में है बिहार का NDA गठबंधन। और वजह है वो इंसान जो खुद को पीएम मोदी का हनुमान बताते हैं। आप समझ ही गए होंगे बात किसकी हो रही।
बिहार की राजनीति में सियासी गर्मी चरम पर है। और इस गर्मी के केंद्र में हैं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान। सवाल बड़ा है- क्या चिराग NDA छोड़ने की तैयारी में हैं? इस वीडियो में हम देंगे आपको इस सवाल का जवाब और बिहार में आए सियासी भूचाल की परतें खोलेंगे। आखिर ख़बरों में क्या चल रहा और इस मामले में राजनीतिक पंडितों का क्या कहना है।
क्योंकि जिस तरह चिराग पासवान नीतीश कुमार पर एक के बाद एक अप्रत्यक्ष हमले कर रहे हैं, वह किसी सहयोगी की भाषा तो बिल्कुल नहीं लगती। फिर चाहे वह बिहार की बिगड़ती कानून व्यवस्था हो या प्रशासन के प्रति आलोचना, चिराग का हर बयान JDU और नीतीश कुमार के खिलाफ जाता है।
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने चिराग पासवान पर तीखा तंज कसते हुए कहा – “जब आप सरकार के अंग हैं, केंद्र में मंत्री हैं और 5 सांसद आपके हैं, फिर आप कमजोर क्यों दिखना चाहते हैं?” तेजस्वी ने चिराग पर सवाल उठाया कि अगर उन्हें लगता है बिहार में अपराध का ग्राफ बढ़ गया है, महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं, तो वे NDA का हिस्सा क्यों बने हुए हैं?
तेजस्वी की यह बात राजनीतिक गलियारों में गूंज रही है – क्या चिराग सच में दो नावों की सवारी कर रहे हैं?
चिराग की नीतीश पर बेमुरव्वत आलोचना
चिराग पासवान ने हाल ही में कहा कि बिहार में अपराधियों का मनोबल बढ़ा है, प्रशासन नतमस्तक है, और ऐसी घटनाएं आने वाले समय में भयावह स्थिति पैदा कर सकती हैं। अब सवाल उठता है; अगर चिराग सच में NDA में बने रहना चाहते हैं, तो वे इस तरह के कड़े हमले क्यों कर रहे हैं?
राजनीतिक पंडितों की माने तो इसका जवाब शायद बिहार चुनाव से पहले सीट शेयरिंग की सियासत में छिपा है।
चलिए आपको तकरीबन पांच साल पीछे लिए चलते है, उस समय जब बिहार विधानसभा चुनाव 2020 की तैयारी शुरू हो चुकी थी सब अपने-अपने गठबंधन को मजबूत करने और सीट शेयरिंग पर बात कर रहे थे। उस वक्त यानी की 2020 में चिराग पासवान ने NDA से अलग होकर चुनाव लड़ा था, और महज एक सीट पर जीत हासिल की। लेकिन उन्होंने JDU को तगड़ा नुकसान पहुंचाया। ख़बरों की मानी तो इस बार फिर चर्चा है कि चिराग ज्यादा सीटों के लिए दबाव बना रहे हैं और इसलिए वे सरकार की कार्यशैली पर बार-बार सवाल उठाते नजर आ रहे है, ताकि BJP पर दबाव बने कि LJP(R) को ज्यादा सीटें दी जाएं।
चिराग ने खुद कहा है – “मैं चाहता हूं कि मेरी पार्टी ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़े।” लेकिन सवाल यह है कि BJP उन्हें कितनी जगह देने को तैयार है?
राजनीतिक गलियारों में एक और चर्चा गर्म है, क्या चिराग पासवान और जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर के बीच कोई मेल हो रहा है?
पप्पू यादव जैसे नेता खुलकर कह रहे हैं, “प्रशांत किशोर को चिराग को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर देना चाहिए।” वहीं चिराग ने भी PK की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा, “वे बिहार की राजनीति में ईमानदारी से काम कर रहे हैं।”
यह वही PK हैं, जिन्होंने कुछ हफ्ते पहले कहा था, “अगर चिराग पासवान बिहार को लेकर गंभीर हैं तो लोकसभा की सीट छोड़कर विधानसभा चुनाव लड़ें।”
ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि चिराग और प्रशांत किशोर एक-दूसरे के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं, चाहे अभी सार्वजनिक गठबंधन न हो।
चिराग पासवान बार-बार कहते हैं – “नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे।” लेकिन उनका हर राजनीतिक हमला नीतीश कुमार पर ही होता है। ऐसे में सियासी विश्लेषक मानते हैं कि चिराग NDA में रहकर BJP को यह मैसेज दे रहे हैं – “या तो ज्यादा सीट दो, या मैं विकल्प देख लूंगा।”
यह दबाव की राजनीति हो सकती है ताकि BJP उन्हें नजरअंदाज न करे, और गठबंधन में उनकी शर्तें मानी जाएं।
अब ऐसे में सवाल उठता है की क्या 2020 वाला ‘एकला चलो’ मॉडल दोहराएंगे चिराग?
हालांकि चिराग पासवान साफ कर चुके हैं कि 2020 की तरह NDA से अलग नहीं जाएंगे, लेकिन राजनीतिक बयानों का कोई स्थायित्व नहीं होता। अगर सीटों पर सहमति नहीं बनती, और BJP-JDU का तालमेल चिराग की उम्मीदों को चोट पहुंचाता है, तो वह फिर से एकला चलो की राह अपना सकते हैं या फिर PK और पप्पू यादव जैसे नेताओं के साथ एक नया फ्रंट बना सकते हैं। फिलहाल ये केवल संभावनाएं हैं
यह भी दिलचस्प है कि चिराग पासवान ने सीधे BJP पर हमला नहीं किया है। यानी BJP से रिश्ता बचाकर, नीतीश पर हमले करना यही रणनीति हो सकती है कि BJP को यह जताया जाए कि अगर JDU को तरजीह दी गई, तो नुकसान हो सकता है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले चिराग पासवान की राजनीति में बहुत कुछ ‘कहा’ से ज्यादा ‘अनकहा’ है। उनकी हर टिप्पणी, हर हमला, हर तारीफ सब एक बड़े गेम प्लान का हिस्सा लगते हैं। सवाल सिर्फ इतना है, क्या चिराग वाकई NDA में रहेंगे? या सीटों की लड़ाई उन्हें किसी नए रास्ते पर ले जाएगी?
फिलहाल तो यही लग रहा है बिहार में NDA की सबसे कमजोर कड़ी भी चिराग पासवान ही बनते जा रहे हैं। अब हमारी आपकी और सबकी निगाहें चिराग पासवान की हर बातों और गतिविधियों पर रहने वाली यह जानने की कोशिश में की आखिर उनका अगला कदम क्या होगा!