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Iran Israel War: कौन है खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई ? ट्रंप की बढ़ेगी मुश्किल?

Wed, 04 Mar 2026 01:39 PM IST
Sahil Suyal वीडियो डेस्क,अमर उजाला

अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर किए गए बड़े सैन्य हमले के बाद पूरे पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। 27 फरवरी को शुरू हुए इस हमले ने न केवल ईरान की सैन्य संरचना को हिला दिया, बल्कि देश की राजनीतिक व्यवस्था को भी गहरे संकट में डाल दिया। इन हमलों में इस्राइली सेना ने बेहद सटीक रणनीति अपनाते हुए ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया। इसी हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और प्रभावशाली नेताओं की मौत की खबर सामने आई।

सुप्रीम लीडर की मौत के बाद ईरान में सत्ता के उत्तराधिकार को लेकर तीखी हलचल शुरू हो गई थी। कई संभावित दावेदारों के नाम सामने आए और देश की राजनीतिक व धार्मिक संस्थाओं के बीच गहन चर्चा शुरू हुई। इस बीच ईरान की प्रभावशाली संस्था गार्डियन काउंसिल ने पहले अंतरिम व्यवस्था के तहत धार्मिक नेता अरापी को नेतृत्व सौंपा था, ताकि देश में प्रशासनिक स्थिरता बनी रहे। लेकिन जैसे-जैसे युद्ध की तीव्रता बढ़ती गई, ईरान की सत्ता संरचना को स्थायी नेतृत्व की जरूरत महसूस होने लगी। इसी पृष्ठभूमि में बुधवार को गार्डियन काउंसिल ने बड़ा फैसला लेते हुए मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुन लिया। मोजतबा खामेनेई, दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बेटे हैं और लंबे समय से उन्हें अपने पिता का संभावित उत्तराधिकारी माना जाता रहा है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है कि आखिर मोजतबा खामेनेई कौन हैं, उनका राजनीतिक और धार्मिक प्रभाव कितना गहरा है और किस तरह वे बिना किसी आधिकारिक पद के भी वर्षों तक ईरान की सत्ता के केंद्र में बने रहे।

मोजतबा खामेनेई का जन्म ईरान के धार्मिक शहर मशहद में हुआ था। 1979 की ऐतिहासिक ईरान की क्रांति के बाद उनके पिता अली खामेनेई ईरान की नई इस्लामी व्यवस्था के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए। इसी दौरान उनका परिवार मशहद से राजधानी तेहरान आकर बस गया। मोजतबा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा तेहरान के प्रतिष्ठित अलावी स्कूल में प्राप्त की। यह स्कूल ईरान के संभ्रांत और प्रभावशाली परिवारों के बच्चों के लिए जाना जाता है। वर्ष 1987 में उन्होंने यहां से अपनी पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने धार्मिक शिक्षा की ओर रुख किया और तेहरान तथा कोम के प्रमुख सेमिनरी संस्थानों में रूढ़िवादी इस्लामी विद्वानों के अधीन अध्ययन किया। धार्मिक शिक्षा के दौरान उन्होंने इस्लामी कानून, शिया धर्मशास्त्र और राजनीतिक इस्लाम के सिद्धांतों पर गहन अध्ययन किया। यही शिक्षा आगे चलकर उनके राजनीतिक प्रभाव को मजबूत करने में भी सहायक बनी।

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