“चिराग पासवान के कितने मंत्री बनेंगे? उनकी हिस्सेदारी आखिर कितनी होगी?” बिहार की राजनीति में इस सवाल ने नई सरकार गठन से पहले ही हलचल मचा दी है। एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद सत्ता गठन का दौर तेज है, लेकिन सबसे चर्चित चेहरा फिलहाल चिराग पासवान ही हैं। कारण साफ है उनकी पार्टी LJP(R) ने 19 सीटें जीतकर खुद को तीसरी सबसे बड़ी ताकत साबित किया है। अब जब मंत्रिमंडल गठन का समय आया है, तो सवाल यही है कि चिराग को उनकी ताकत के बराबर हिस्सा मिलेगा या नहीं।
नई सरकार 20 नवंबर को शपथ लेगी और मुख्यमंत्री पद की शपथ एक बार फिर नीतीश कुमार ही लेंगे। कुल 36 मंत्री पदों वाले इस मंत्रिमंडल में किसे कितनी हिस्सेदारी मिलेगी, इसका फॉर्मूला दिल्ली में हुई एनडीए की बैठक में तय कर लिया गया है। छह विधायकों पर एक मंत्री का यह फॉर्मूला जदयू और भाजपा दोनों पर लागू होगा। लेकिन इसी फॉर्मूले के आधार पर चिराग पासवान अब तीन मंत्री पद की ज़िद पर अड़े हैं।
दरअसल, चिराग की पार्टी के 19 विधायक हैं। ऐसे में गणित कहता है कि LJP(R) को तीन मंत्री मिलना चाहिए। लेकिन अंदरखाने से जो संकेत निकलकर आ रहे हैं, उसके मुताबिक एनडीए के भीतर फिलहाल LJP(R) को दो मंत्री पद देने की सहमति बनी है। यही वजह है कि सवाल और गहराता जा रहा है क्या चिराग को कम प्रतिनिधित्व मिलेगा? या आखिरी दौर में उनकी मांग मान ली जाएगी?
रविवार को दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में एनडीए के शीर्ष नेताओं की बैठक हुई। इसी बैठक में सरकार गठन, विभागों के बंटवारे और मंत्री संख्या पर चर्चा हुई। इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और जदयू के संजय झा व ललन सिंह के बीच भी लंबी चर्चा चली। सूत्रों के मुताबिक, दोनों बड़ी पार्टियों भाजपा और जदयू ने मंत्री संख्या 16-16 पर सहमति जताई है।
भाजपा के 89 विधायक हैं और वह एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। ऐसे में भाजपा दो उपमुख्यमंत्री समेत 16 मंत्रियों को शपथ दिलाने की तैयारी में है। दूसरी ओर जदयू, जिसके 85 विधायक हैं, वह सीएम पद के अलावा 15 मंत्री लेने पर तैयार दिख रही है। यदि जदयू 15 पर मान जाती है, तो इसका सीधा फायदा LJP(R) को होगा और चिराग के तीन मंत्री बनने का रास्ता साफ हो सकता है।
सभी पार्टियाँ अपने विधायक दल के नेताओं का चयन कर रही हैं। चिराग पासवान ने अपने दल का नेता राजू तिवारी को चुना है, जो सरकार में LJP(R) की भूमिका को आगे बढ़ाएंगे। हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के पांच और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चार विधायक भी अपने-अपने हिस्से के एक-एक मंत्री पर सहमति बना चुके हैं।
लेकिन इन सबके बीच असली चर्चा चिराग पासवान को लेकर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिन क्षेत्रों में LJP(R) ने शानदार प्रदर्शन किया है, वह चिराग को ज्यादा ताकत से अपनी बात रखने का आधार देता है। साथ ही, चिराग के लगातार बढ़ते जनाधार और युवा वोटरों पर पकड़ ने उन्हें एनडीए की राजनीति में एक अपरिहार्य चेहरा बना दिया है।
नीतीश कुमार आज कैबिनेट बैठक के बाद राज्यपाल को इस्तीफा सौंपेंगे और नई सरकार बनाने की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। इधर, एनडीए के सभी घटक दल अपनी अंतिम मंत्रियों की सूची तैयार कर रहे हैं।
अगले 24 से 48 घंटे यह साफ कर देंगे कि क्या चिराग अपनी बात मनवाकर तीन मंत्री बनवा पाएंगे, या एक बार फिर उन्हें कम हिस्सेदारी से समझौता करना पड़ेगा? बिहार की नई सरकार के शपथ से पहले मंत्रिमंडल का यह समीकरण सूबे में सबसे बड़ी राजनीतिक चर्चा बन गया है।