दिल्ली में मुंडका के सेप्टिक टैंक हादसे ने सिर्फ तीन मजदूरों की जान नहीं ली, बल्कि कई परिवारों की खुशियां भी हमेशा के लिए छीन लीं। सबसे दर्दनाक कहानी 42 वर्षीय चांद की है, जिनके जाने से उनके परिवार की दुनिया उजड़ गई। ढाई साल की मासूम बेटी और महज आठ महीने के बेटे के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। अब इन नन्हे बच्चों को शायद कभी ये भी समझ नहीं आएगा कि उनके पिता रोज उनकी बेहतर जिंदगी के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर मेहनत करने जाते थे...
चांद के भतीजे वासु ने नम आंखों से बताया कि दोपहर में पड़ोस के कुछ लोग अचानक घर पहुंचे और चाचा का पहचान पत्र मांगा। जब उन्होंने किसी अनहोनी की आशंका जताई, तो उनका दिल बैठ गया। वह बदहवास होकर फैक्टरी की ओर दौड़े। वहां जो मंजर देखा, उसने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया। सेप्टिक टैंक से निकाले गए चाचा चांद को मृत अवस्था में देखकर उनकी चीख निकल गई। पलभर में पूरा परिवार मातम में डूब गया।
चांद चाचा के परिवार में उनकी पत्नी और दो मासूम बच्चे हैं। रोते हुए वासु ने बताया कि चाचा रोज सुबह काम पर निकलते थे जबकि शाम को मोमोज-फिंगर की रेहड़ी लगाते थे। पूरा परिवार किराए के मकान में जीवन गुजर बसर करते थे। उनकी मौत की खबर जैसे ही उनके घर पहुंची। पूरे परिवार में मातम पसर गया। किराए एक छोटे से कमरे में चीख पुकार मच गई। परिजनों ने बताया कि चांद बेहद स्वाभिमानी और मेहनती इंसान थे। शुक्रवार को वह काम पर निकले थे कि चंद रुपये उसकी गृहस्थी की गाड़ी को चलाने के काम आएंगे लेकिन इस हादसे ने उन्हें छीन लिया और गृहस्थी की गाड़ी उनकी मौत से पटरी से उतर गई...