दिल्ली-एनसीआर में दीपावली की रौनक बीती रात तक तो आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी और आतिशबाजी से भरी थी, लेकिन आज सुबह का नजारा कुछ और ही था। पटाखों की धुआं और प्रदूषण अब शहर की हवा में घुल चुका है। दीवाली के दूसरे ही दिन राजधानी दिल्ली ‘गैस चैंबर’ बन गई है। लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी हो रही है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली की हवा इस समय ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच चुकी है। पूरे शहर का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 531 पर दर्ज किया गया है, जो बेहद खतरनाक स्तर माना जाता है।
दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता बेहद चिंताजनक है। नरेला में आज सुबह एक्यूआई 551 दर्ज किया गया, जो पूरे एनसीआर में सबसे खराब है। अशोक विहार में 493, आनंद विहार में 394, आरके पुरम में 368 और आईटीओ पर 259 का एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम क्षेत्र के आसपास वायु गुणवत्ता सूचकांक 317 पर रहा।
दिल्ली से सटे नोएडा में भी हालात बहुत बेहतर नहीं हैं वहां एक्यूआई 369 है, जबकि गाजियाबाद में यह 402 तक पहुंच गया है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है।
सुबह की हवा में हल्की ठंडक के साथ जब लोग टहलने निकले, तो उन्हें सांस लेने में तकलीफ महसूस हुई। कई इलाकों में धुंध इतनी घनी थी कि कुछ मीटर आगे तक भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था। यह दृश्य न केवल दृश्यता घटा रहा है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है।
दिल्ली में हवा का यह स्तर इतना खराब हो गया है कि डॉक्टरों ने बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा के मरीजों को घरों में रहने की सलाह दी है। कई अस्पतालों में सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।
दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू किया गया है। इसके तहत डीजल वाहनों के उपयोग पर रोक, निर्माण कार्यों पर सख्ती और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे नियम लागू किए जा रहे हैं।
प्रशासन ने यह भी कहा है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो GRAP-3 या GRAP-4 चरण भी लागू किया जा सकता है, जिसमें स्कूल बंद करने और निजी वाहनों के आवागमन पर पाबंदी जैसी सख्त कार्रवाइयां शामिल हैं।
लोग सोशल मीडिया पर प्रदूषण को लेकर अपनी नाराज़गी और चिंता जता रहे हैं। कई लोगों ने लिखा कि दीपावली की खुशी अब सांसों की तकलीफ में बदल गई है। कुछ लोगों ने तो इसे ‘धुआंवाली दिवाली’ करार दिया।
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियों से पानी छिड़काव, सड़कों की सफाई और हॉटस्पॉट इलाकों में एंटी-स्मॉग गन लगाने के निर्देश दिए हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दो से तीन दिन तक हालात और बिगड़ सकते हैं क्योंकि इस समय हवा की गति बहुत कम है। धीमी हवा के कारण धुआं और धूलकण हवा में लंबे समय तक ठहर जाते हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है।
दिल्ली-एनसीआर में दीपावली के बाद यह हाल कोई नया नहीं है, लेकिन इस बार स्थिति और भी गंभीर है। लगातार बढ़ते AQI ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या त्योहार की खुशी की कीमत हम अपनी सेहत से चुका रहे हैं?
दीपावली की जगमग रोशनी के बाद दिल्ली एक बार फिर धुंध के अंधेरे में डूब गई है। हवा में घुला जहर अब हर सांस में महसूस हो रहा है। प्रशासन अलर्ट पर है, लेकिन असली जिम्मेदारी अब नागरिकों की है क्योंकि जब तक हम खुद नहीं बदलेंगे, तब तक ‘गैस चैंबर’ से बाहर निकलना मुमकिन नहीं।