दिल्ली में प्रदूषण और ट्रैफिक की चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राजधानी की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी ईवी पॉलिसी को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। एक जुलाई से लागू होने वाली इस नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों पर पहले से ज्यादा सब्सिडी मिलेगी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार होगा और आने वाले वर्षों में पेट्रोल-डीजल से चलने वाले कई नए वाहनों के पंजीकरण पर भी चरणबद्ध तरीके से रोक लगेगी। सरकार का दावा है कि इस नीति से लोगों को करीब 15 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ मिलेगा।
दिल्ली सरकार ने सोमवार को नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सचिवालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद यह नीति एक जुलाई से लागू होगी और 31 अगस्त 2031 तक प्रभावी रहेगी। सरकार का कहना है कि यह नीति राजधानी में प्रदूषण कम करने, स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने और आम लोगों का खर्च घटाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।
सरकार के मुताबिक नई ईवी पॉलिसी से दिल्लीवासियों को करीब 15 हजार करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलने का अनुमान है। इसी उद्देश्य से इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, ट्रक, मालवाहक वाहन और ग्रामीण सेवा वाहनों के लिए सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी की गई है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए प्रेरित हों।
नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर पहले वर्ष अधिकतम 30 हजार रुपये तक की खरीद सब्सिडी मिलेगी। इलेक्ट्रिक ऑटो खरीदने वालों को 50 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा, जबकि एन-1 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रकों पर पहले वर्ष एक लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी। इसके अलावा ग्रामीण सेवा वाहनों के लिए 20 हजार रुपये का स्क्रैपिंग इंसेंटिव भी दिया जाएगा। हालांकि निजी इलेक्ट्रिक कारों पर खरीद सब्सिडी नहीं मिलेगी, लेकिन पुराने बीएस-4 या उससे नीचे के वाहन को स्क्रैप कराने पर एक लाख रुपये तक का प्रोत्साहन मिलेगा।
सरकार ने टैक्स में भी बड़ी राहत दी है। सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, व्यावसायिक वाहन और 30 लाख रुपये तक कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। वहीं स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों को 50 प्रतिशत की राहत मिलेगी। हालांकि 30 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों को इस छूट का लाभ नहीं मिलेगा।
नई ईवी पॉलिसी में भविष्य की तैयारी भी साफ दिखाई देती है। सरकार ने चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल और डीजल वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाने का फैसला किया है। इसके तहत एक जनवरी 2027 से नए तीनपहिया वाहनों का पंजीकरण केवल इलेक्ट्रिक रूप में होगा। वहीं अप्रैल 2028 से नए दोपहिया वाहनों का पंजीकरण भी सिर्फ इलेक्ट्रिक श्रेणी में किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे राजधानी में प्रदूषण के स्तर में उल्लेखनीय कमी आएगी।
ईवी अपनाने में सबसे बड़ी चुनौती चार्जिंग सुविधा रही है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर चार्जिंग स्टेशन विकसित करेगी। साथ ही डिस्कॉम कंपनियों के सहयोग से घरों में ईवी चार्जिंग के लिए अलग बिजली मीटर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा इस नीति के तहत खरीदे गए इलेक्ट्रिक वाहन तीन वर्ष तक दिल्ली के बाहर नहीं बेचे जा सकेंगे, ताकि सरकारी प्रोत्साहन का लाभ केवल दिल्ली में ही मिले।
दिल्ली सरकार की नई ईवी पॉलिसी केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की योजना नहीं, बल्कि राजधानी के परिवहन तंत्र को भविष्य के अनुरूप बनाने का रोडमैप है। सब्सिडी, टैक्स में राहत, चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार और पेट्रोल-डीजल वाहनों पर चरणबद्ध नियंत्रण जैसे कदम यह संकेत देते हैं कि आने वाले वर्षों में दिल्ली की सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि नीति का क्रियान्वयन कितना प्रभावी होता है और यह राजधानी के प्रदूषण पर कितना असर डाल पाती है।