दिल्ली ब्लास्ट में मेवात कनेक्शन के सामने आने के बाद। अब एक नोटबुक से बड़े राज का पर्दा उठा है। खबरों की मानें तो जांच एजेंसियों को डॉक्टर उमर और मुजम्मिल की डायरियां मिलीं हैं। डायरी और नोटबुक में कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया गया है। इतना ही नहीं तीन लाख का 20 क्विंटल से ज्यादा उर्वरक खरीदा गया था। स्पेशल सेल की टीम ने नूंह में छापा मारा है। वहां कई फर्टिलाइजर की दुकानों की वीडियो बनाकर जम्मू कश्मीर पुलिस को भेजा है, ताकि मुजम्मिल उस दुकान की पहचान कर सके जहां से उसने और उमर ने फर्टिलाइजर के तौर पर केमिकल लिया था। यह जानकारी भी सामने आई है कि लाल किला विस्फोट के आरोपी डॉ. मुजम्मिल, डॉ. अदील, उमर और शाहीन ने मिलकर लगभग 20 लाख रुपये नकद जुटाए, ये रुपये उमर को सौंपे गए थे। खैर सुरक्षा एजेंसी के हाथ जो डायरी लगी हैं। कयास लगाए जा रहें है कि अब दिल्ली धमाका के कई सवालों के जवाब मिलने की संभावना है। यह डायरी मंगलवार और बुधवार को अलफलाह यूनिवर्सिटी के कैंपस के अंदर डॉक्टर उमर के रूम नंबर चार और मुजम्मिल के रूम नंबर 13 से मिली हैं। इसके अलावा पुलिस को एक डायरी मुजम्मिल के उस कमरे से भी मिली है जहां से पुलिस ने धौज में 360 किलो विस्फोटक बरामद किया था और यह अलफलाह यूनिवर्सिटी से महज 300 मीटर की दूरी पर है। खबरों की मानें जो डायरी और नोटबुक मिली उनमें कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया गया है, जिनका रेफरेंस आठ से 12 नवंबर के तौर पर भी आ रहा है। सूत्रों की मानें तो डायरी के अंदर ऑपरेशन शब्द का कई बार इस्तेमाल किया गया है। दिल्ली बम धमाके और फरीदाबाद में मिले 2921 किलो विस्फोटक समेत आतंक की पूरी कहानी अल फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 के कमरा नंबर 13 में रची जा रही थी। तीसरी मंजिल पर स्थित ये कमरा यहां कार्यरत डॉ. मुज्जमिल अहमद गनेई उर्फ मुसैब को अलॉट था। इसके बगल वाला कमरा दिल्ली धमाके में शामिल डॉ. उमर को अलॉट था, लेकिन उमर अपना कमरा छोड़कर मुज्जमिल के साथ ही रहता था। यूनिवर्सिटी के सूत्रों ने बताया कि दोनों बीते कई माह से काफी अच्छे दोस्त थे। वे यूनिवर्सिटी परिसर में अधिकतर समय एक साथ बिताते थे और एक-दूसरे से ही चर्चाओं का दौर रखते थे। इनके कई अन्य दोस्त भी थे जो अक्सर इनके साथ देखे जाते रहे हैं।