ओडिशा के ऐतिहासिक शहर कटक में 4 और 5 अक्टूबर 2025 को दुर्गा मूर्ति विसर्जन के दौरान दो समूहों के बीच हिंसक झड़प हो गई, जिसके बाद शहर में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया। इस घटना के चलते कई लोग घायल हुए, जिनमें पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए शहर के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया और इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया।
हिंसा की शुरुआत शनिवार, 4 अक्टूबर की देर रात दरगाह बाजार इलाके में हुई, जब दुर्गा मूर्ति विसर्जन का जुलूस निकाला जा रहा था। रिपोर्टों के अनुसार, जुलूस में बज रहे तेज संगीत को लेकर एक समूह ने आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई। यह बहस जल्द ही हिंसक झड़प में तब्दील हो गई।दोनों तरफ से पथराव शुरू हो गया और कुछ उपद्रवियों ने दुकानों और वाहनों में आगजनी भी की। इस पथराव में कटक के डीसीपी ऋषिकेश ज्ञानदेव समेत कई पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों को चोटें आईं।
अगले दिन, रविवार को स्थिति और बिगड़ गई जब एक संगठन द्वारा निकाली जा रही बाइक रैली को पुलिस ने रोकने की कोशिश की। इसके बाद फिर से झड़पें हुईं, जिसमें कई और लोग घायल हो गए।हिंसा के बाद, प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए भुवनेश्वर-कटक पुलिस आयुक्तालय ने कटक के 13 थाना क्षेत्रों में 36 घंटे का कर्फ्यू लागू कर दिया।
अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए शहर में इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया।पुलिस ने हिंसा में शामिल होने के आरोप में कई लोगों को गिरफ्तार किया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अन्य उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। शहर में शांति बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए शांति की अपील की है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी लोगों से शांति और सद्भाव बनाए रखने का आग्रह किया है।इस घटना के विरोध में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सोमवार को 12 घंटे के बंद का आह्वान किया, जिससे शहर में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।कटक, जो अपनी भाईचारे की संस्कृति के लिए जाना जाता है, इस घटना के बाद से तनाव में है। प्रशासन और पुलिस स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं और शांति बहाली के प्रयास जारी हैं।