प्रशांत किशोर का मुख्य आरोप है कि अशोक चौधरी और उनके परिवार (पत्नी, बेटी शांभवी और समधन अनीता कुणाल) ने पिछले कुछ वर्षों में, खासकर उनकी बेटी शांभवी की सगाई के बाद, मानव वैभव विकास ट्रस्ट किशोर ने अशोक चौधरी पर सरकारी निविदाओं (टेंडरों) और ठेकेदारों को भुगतान करने में कमीशन (5% तक) लेने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि चौधरी ने 20 हजार करोड़ रुपये के ठेके दिए हैं और इस तरह से 500 करोड़ रुपये तक की काली कमाई की है। अशोक चौधरी द्वारा मानहानि का नोटिस भेजे जाने के बाद, प्रशांत किशोर ने उन्हें चुनौती दी कि वे सात दिनों के भीतर नोटिस वापस लें और जनता के सामने संपत्ति के बारे में स्वीकार करें। ऐसा न करने पर उन्होंने ₹500 करोड़ रुपये की और अवैध संपत्ति का ब्योरा जारी करने की धमकी दी है।
अशोक चौधरी ने इन सभी आरोपों को झूठा, भ्रामक और निराधार बताया है। उन्होंने प्रशांत किशोर को ₹100 करोड़ रुपये का मानहानि का नोटिस भेजा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी बेटी शांभवी चौधरी द्वारा खरीदी गई संपत्ति वैधानिक आय से खरीदी गई है और इसका उल्लेख उनके चुनावी शपथ पत्र में भी किया गया है। उनका कहना है कि प्रशांत किशोर ये आरोप उनके खिलाफ पहले से चल रहे मानहानि के एक अन्य मामले में कोर्ट से समन मिलने के बाद बौखलाहट में लगा रहे हैं। चौधरी ने ट्रस्ट के कामकाज और उसकी संपत्ति से किसी भी तरह के जुड़ाव से इनकार किया है।
जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा, "अशोक चौधरी के संपत्ति पर जो बात कही गई है हम उस पर कायम हैं। इन्होंने 200 करोड़ की संपत्ति अर्जित की है। इन्होंने कैमरे पर कहा 1 कट्ठा भी जमीन हो जाएगा तो मैं जन सुराज की गुलामी करूंगा। अभी कागज जारी हुआ है उसमें आप कहिए कि ये आपकी जमीन नहीं है। अगर जमीन है तो जन सुराज की गुलामी मत करिए बिहार के लोगों की गुलामी के लिए तैयार हो जाएं, इस्तीफा दीजिए. हम लोग राज्यपाल के पास और कोर्ट में जाएंगे। इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए