केंद्रीय मंत्री सुकांता मजूमदार ने कहा, "TMC को निष्पक्ष प्रशासन की आदत नहीं है। चुनाव आयोग ऐसे अधिकारियों को नियुक्त कर रहा है जो ईमानदारी, अनुशासन और निष्पक्ष होने के लिए जाने जाते हैं वे चुनाव आयोग और भारत के चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त अधिकारियों के काम में रुकावट डालने के लिए कोर्ट जाने की कोशिश कर रहे हैं.समस्या यह है कि TMC अपराधियों को राजनीतिक नेताओं में बदल रही है। अभिषेक बनर्जी इस तरह की गतिविधि कर रहे हैं.भाजपा ने पहले ही 100 सीटें हासिल कर ली हैं। अब चुनाव के दूसरे चरण में सरकार बनाने की बारी भाजपा की है
सुकांत मजूमदार द्वारा दिया गया यह बयान पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और आरोप-प्रत्यारोप की पृष्ठभूमि में समझा जाना चाहिए। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर आरोप लगाया कि उसे निष्पक्ष प्रशासन चलाने की आदत नहीं है और वह चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करती है। उनके अनुसार, भारत का चुनाव आयोग (Election Commission of India) जिन अधिकारियों को चुनाव के दौरान नियुक्त कर रहा है—जो ईमानदारी, अनुशासन और निष्पक्षता के लिए जाने जाते हैं—TMC उन अधिकारियों के काम में बाधा डालने के लिए अदालत का सहारा लेने की कोशिश कर रही है। यह आरोप भारतीय चुनावी राजनीति में अक्सर देखने को मिलता है, जहाँ राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच अधिकारों और निर्णयों को लेकर मतभेद सामने आते हैं।
मजूमदार ने आगे यह भी दावा किया कि TMC ऐसे लोगों को राजनीति में बढ़ावा दे रही है जिनकी पृष्ठभूमि आपराधिक रही है, और उन्हें राजनीतिक नेता बना रही है। इस संदर्भ में उन्होंने अभिषेक बनर्जी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि वे इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ऐसे आरोप राजनीतिक बयानबाज़ी का हिस्सा होते हैं और किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोपों की पुष्टि केवल न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के निर्णय से ही होती है।
इसके अलावा, मजूमदार ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पहले ही 100 सीटें हासिल कर ली हैं और दूसरे चरण के चुनाव के बाद सरकार बनाने की स्थिति में होगी। यह दावा भी चुनावी माहौल में पार्टी का आत्मविश्वास दिखाने वाला बयान माना जाता है। वास्तविकता में, किसी भी चुनाव के परिणाम केवल आधिकारिक मतगणना के बाद ही स्पष्ट होते हैं, जिन्हें अंततः भारत का चुनाव आयोग द्वारा घोषित किया जाता है। चुनाव के दौरान इस तरह के दावे आम हैं, जिनका उद्देश्य कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना और मतदाताओं को प्रभावित करना होता है।
समग्र रूप से देखा जाए तो यह पूरा बयान पश्चिम बंगाल की तीखी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है, जहाँ सत्तारूढ़ TMC और विपक्षी BJP के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप चलते रहते हैं। मतदाताओं के लिए आवश्यक है कि वे इन दावों को सुनते समय आधिकारिक जानकारी, विश्वसनीय स्रोतों और अंतिम चुनाव परिणामों को ध्यान में रखकर अपनी राय बनाएं।