एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान कहते हैं, "मैं बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों की निंदा करता हूं.हिंसा नहीं होनी चाहिए.भारत में भी मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार होते हैं.उन्हें भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या करने का अधिकार किसने दिया? इस पूरे मामले पर और क्या कुछ कहा है उन्होंने आप खुद सुनिए उन्हीं की जुबानी
बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों और हत्याओं के मामले में AIMIM (All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। दिसंबर 2025 के अंत में दिए गए अपने बयानों में ओवैसी ने बांग्लादेश में हाल ही में हुई दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल जैसी हिंसक हत्याओं की कड़ी निंदा की।
उन्होंने भारत सरकार और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार (मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली) से कुछ प्रमुख मांगें की हैं ओवैसी ने मांग की है कि बांग्लादेश सरकार वहां रहने वाले लगभग 2 करोड़ गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों के जीवन, संपत्ति और मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि ये हिंसा बांग्लादेश के अपने संविधान (विशेष रूप से अनुच्छेद 12 और 41) के खिलाफ है जो धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है।
उन्होंने हत्या के मामलों में निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है। ओवैसी ने भारत सरकार के उन कदमों का समर्थन किया जो बांग्लादेश के साथ संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए उठाए जा रहे हैं। उनका मानना है कि बांग्लादेश में स्थिरता भारत की सुरक्षा, विशेषकर पूर्वोत्तर (Northeast) राज्यों की शांति के लिए बेहद जरूरी है।
उन्होंने चेतावनी दी कि बांग्लादेश की अस्थिरता का फायदा चीन और ISI जैसी भारत विरोधी ताकतें उठा सकती हैं, इसलिए भारत सरकार को इस मोर्चे पर सतर्क रहना चाहिए।इसके साथ ही, ओवैसी ने यह भी कहा कि जहां भी 'मॉब लिंचिंग' (भीड़ द्वारा हत्या) होती है, चाहे वह बांग्लादेश में हो या भारत में, वह निंदनीय है और कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए।