अंबाला में सिख समाज और पुलिस के बीच हुई भिड़ंत ने पूरे विवाद को और ज्यादा गरमा दिया है। लेकिन इस तनाव की शुरुआत आखिर हुई कहां से? पूरा मामला जुड़ा है गुरसिमरन सिंह मंड से। वही मंड, जिनकी कुछ दिन पहले ऐतिहासिक पंजोखरा साहिब गुरुद्वारे में कथित तौर पर पिटाई हुई थी। मंड खुद को खालिस्तान विरोधी नेता बताते हैं और इंटरनेशनल एंटी-खालिस्तानी टेररिस्ट फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनकी पिटाई के बाद पुलिस ने कुछ युवाओं के खिलाफ कार्रवाई की, लेकिन सिख समाज का आरोप है कि कार्रवाई एकतरफा हुई। इसी के बाद गुरुवार को प्रदर्शन हुआ, हाईवे जाम हुआ और बात पुलिस से टकराव तक पहुंच गई। आखिर कौन हैं गुरसिमरन सिंह मंड और क्यों उनके नाम पर इतना बवाल मचा है?
गुरसिमरन सिंह मंड... नाम भले ही बहुत बड़ा न हो, लेकिन खालिस्तान विरोधी गतिविधियों को लेकर वह लगातार चर्चा में रहे हैं। मंड खुद को खालिस्तान विरोधी सिख नेता के तौर पर पेश करते हैं और इंटरनेशनल एंटी-खालिस्तानी टेररिस्ट फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
उनकी पहचान ऐसे शख्स के तौर पर रही है जो सार्वजनिक तौर पर खालिस्तान समर्थक विचारधारा का विरोध करते हैं। यही वजह है कि कई मौकों पर उनका विरोध भी देखने को मिला है।
लेकिन इस बार विवाद उनके राजनीतिक या वैचारिक बयानों से नहीं, बल्कि पंजोखरा साहिब गुरुद्वारे में हुई एक घटना से शुरू हुआ।
सात अगस्त को गुरसिमरन सिंह मंड पंजोखरा साहिब गुरुद्वारे पहुंचे थे। मंड का आरोप है कि गुरुद्वारे के मुख्य द्वार के पास कुछ निहंगों ने उन्हें रोक लिया। पहले कहासुनी हुई और फिर उनके साथ डंडों और तेजधार हथियारों से हमला किया गया।
मंड के मुताबिक, जब वह वहां से निकलने की कोशिश करने लगे तो बाहर मौजूद भीड़ ने उनकी कार को घेर लिया। आरोप है कि उनके साथ मारपीट की गई और उनकी गाड़ी में भी तोड़फोड़ की गई।
मंड ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि उन्हें जबरन देश विरोधी नारे लगाने और कान पकड़कर माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
इस घटना में मंड के साथ उनके बेटे भवजोत सिंह भी घायल हुए। इसके अलावा हरियाणा पुलिस और सीआईडी के कुछ जवान भी घायल हुए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की।
यहीं से विवाद ने दूसरा मोड़ लिया।
सिख समाज के लोगों का आरोप है कि पुलिस ने मामले में एकतरफा कार्रवाई की और जिन युवाओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं मंड के खिलाफ दी गई शिकायत पर कार्रवाई नहीं की गई।
इसी के विरोध में गुरुवार को पंजोखरा साहिब में सिख संगत की बैठक हुई। बैठक के बाद प्रदर्शनकारी जीटी रोड पर पहुंच गए और हाईवे जाम कर दिया।
प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि गुरसिमरन सिंह मंड के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाए और गिरफ्तार किए गए युवाओं को रिहा किया जाए।
लेकिन प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार झड़प हुई। बैरिकेड तोड़े गए, पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और आखिरकार मामला हिंसक टकराव तक पहुंच गया।
पुलिस के मुताबिक, हाईवे खाली कराने पहुंची टीम पर भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने धारदार हथियारों से हमला किया। इस हमले में एक डीएसपी समेत कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई है।
यानी कुछ दिन पहले गुरुद्वारे में मंड की पिटाई से शुरू हुआ विवाद अब गुरुद्वारे से निकलकर सड़क और फिर पुलिस बनाम प्रदर्शनकारी टकराव तक पहुंच चुका है।
पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान में जुटी है। वहीं, सिख समाज अपनी मांगों पर कायम है।
फिलहाल सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि गुरसिमरन सिंह मंड के साथ उस दिन क्या हुआ था। बड़ा सवाल यह है कि उस घटना के बाद कार्रवाई को लेकर पैदा हुआ विवाद आखिर इतना बढ़ गया कि अंबाला की सड़कों पर पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने आ गए।