महाराष्ट्र का चुनाव इसलिए ऐतिहासिक है कि जनता ने महाविकास आघाड़ी को कुल जितनी सीटें दीं, उसके ढाई गुना से अधिक अकेले भाजपा को मिली हैं। आघाड़ी 50 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा को 132 सीटें मिली हैं। यह पहली बार है जब महाराष्ट्र में कोई नेता विपक्ष नहीं होगा।