पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे सियासी पारा भी चढ़ता जा रहा है। इस बार चुनावी बहस केवल विकास, योजनाओं और वादों तक सीमित नहीं रही, बल्कि खान-पान भी राजनीति का अहम मुद्दा बन गया है। राज्य की पहचान माने जाने वाले झालमुड़ी, मछली और अंडे अब भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बीच जुबानी जंग का केंद्र बन चुके हैं। एक साधारण दिखने वाली घटना ने ऐसा मोड़ लिया कि उसने पूरे चुनावी माहौल को और ज्यादा गरमा दिया।इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के झारग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान सड़क किनारे एक दुकान पर रुककर मशहूर बंगाली नाश्ता ‘झालमुड़ी’ का स्वाद लिया। आम जनता से जुड़ने का यह अंदाज भाजपा के समर्थकों को काफी पसंद आया और इसे जमीनी स्तर पर लोगों से संपर्क का प्रतीक बताया गया। लेकिन इस घटना ने जल्द ही राजनीतिक रंग ले लिया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रधानमंत्री के इस कदम को पूरी तरह से ‘नाटक’ करार दिया। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने जो झालमुड़ी खाई, वह वास्तव में दुकानदार द्वारा नहीं बनाई गई थी, बल्कि सुरक्षा में तैनात एसपीजी (SPG) के जवानों द्वारा तैयार की गई थी। उन्होंने कहा कि यह सब एक सोची-समझी चुनावी रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद जनता को प्रभावित करना और वोट हासिल करना है। ममता ने इसे ‘चुनावी स्टंट’ बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आम लोगों के बीच जाकर दिखावा कर रहे हैं, जबकि हकीकत कुछ और है।इस बयान के बाद भाजपा ने भी पलटवार करने में देर नहीं लगाई। पार्टी के नेताओं ने ममता बनर्जी के आरोपों को बेबुनियाद और राजनीतिक निराशा का परिणाम बताया। भाजपा का कहना है कि प्रधानमंत्री का यह कदम पूरी तरह से स्वाभाविक था और इसका मकसद स्थानीय व्यापारियों और आम लोगों के साथ जुड़ाव दिखाना था। भाजपा नेताओं ने इसे बंगाल की संस्कृति के प्रति सम्मान के रूप में भी पेश किया।
लेकिन विवाद यहीं नहीं रुका। खान-पान की बहस ने एक और बड़ा रूप तब ले लिया जब तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। टीएमसी का दावा है कि यदि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है, तो राज्य में मछली, मांस और अंडे जैसे खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। बंगाल जैसे राज्य में, जहां मछली लोगों के दैनिक भोजन का अहम हिस्सा है, यह आरोप काफी संवेदनशील माना जा रहा है।