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पढ़ाई छोड़कर आई युवती ने खोले बाबा की काली करतूतों के पोल

Thu, 25 Sep 2025 03:37 PM IST
आदर्श अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर “गुरु के वेश में शोषक” की शर्मनाक कहानी सामने आई है। मामला उस आश्रम से जुड़ा है, जहां छात्राओं को शिक्षा और संस्कार देने का दावा किया जाता था, लेकिन उन्हीं छात्राओं के साथ उनके प्रबंधक और खुद को स्वामी बताने वाले शख्स ने लगातार छेड़छाड़ और अश्लील हरकतें कीं। आरोपी का नाम है स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ पार्थ सारथी, जिसके खिलाफ पहले भी यौन उत्पीड़न के मामले दर्ज हो चुके हैं।

दरअसल, श्री श्रृंगेरी मठ के अधीन चलने वाले दिल्ली के वसंतकुंज इलाके में स्थित श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट में पढ़ने वाली एक छात्रा ने साहस दिखाया। कानून की पूर्व छात्रा और फिलहाल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही इस युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उसकी शिकायत ने उस गंदी सच्चाई को उजागर कर दिया, जो लंबे समय से संस्थान की दीवारों के पीछे दबाई जा रही थी।

पुलिस के अनुसार, आरोपी प्रबंधक छात्राओं को डराता-धमकाता था। उन्हें फेल करने, नंबर कम करने जैसी धमकी देता और जबरन अपने पास बुलवाता। आरोप है कि छात्रावास की तीन वार्डन खुद छात्राओं को उसके पास भेजती थीं। वहीं, फैकल्टी के कुछ लोग भी उसकी मदद कर रहे थे।

पीड़ित छात्राओं का कहना है कि चैतन्यानंद उन्हें मोबाइल पर अश्लील संदेश भेजता था। मौका मिलने पर छेड़छाड़ करता और जबरन छूने की कोशिश करता। विरोध करने पर दबाव डालता और करियर बर्बाद करने की धमकी देता। कई छात्राएं मध्यमवर्गीय परिवार से थीं, इसलिए चुपचाप सहती रहीं। मामला तब खुला जब एक छात्रा ने हिम्मत दिखाई और पुलिस से संपर्क किया।

यह भी सामने आया कि पार्थ सारथी का विवादों से पुराना नाता है। दक्षिण दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी थाने में वर्ष 2009 और 2016 में उस पर यौन उत्पीड़न के मुकदमे दर्ज हैं। यानी, यह कोई पहला मौका नहीं है जब उसका नाम ऐसे मामलों में आया हो। सवाल यह उठता है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद वह कैसे एक प्रतिष्ठित संस्थान का प्रबंधक बना रहा और छात्राओं पर दबदबा बनाए रखा।

छात्राओं की शिकायत के बाद श्रृंगेरी मठ के प्रशासक पी.ए. मुरली ने भी पुलिस को तहरीर दी, जिसमें आरोपी के साथ-साथ कुछ फैकल्टी और प्रशासनिक अधिकारियों का भी जिक्र था। इसके बाद दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस ने जांच शुरू की।

लेकिन यहां बड़ा सवाल खड़ा होता है दो महीने की जांच के बावजूद पुलिस अभी तक आरोपी को गिरफ्तार क्यों नहीं कर सकी? पुलिस का कहना है कि आरोपी की लोकेशन आगरा (उत्तर प्रदेश) में मिली थी, लेकिन उसके बाद से वह पकड़ में नहीं आया।

इस ढुलमुल रवैये ने पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिरकार एक ऐसा शख्स, जिस पर पहले भी केस दर्ज हैं और अब फिर छात्राओं ने खुलकर आरोप लगाए हैं, वह अभी तक कानून की गिरफ्त से बाहर क्यों है?

जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, किसी भी छात्रा ने दुष्कर्म का आरोप नहीं लगाया है। सभी ने सिर्फ छेड़छाड़, अश्लील बातें करने और जबरन छूने की कोशिश की शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस का कहना है कि मामले की कई कोणों से जांच हो रही है। लेकिन पीड़ित छात्राओं ने यह भी बताया कि उन्हें डराया और धमकाया गया, ताकि उनकी आवाज दबाई जा सके।

छात्राओं का कहना है कि आरोपी को फैकल्टी और वार्डन का पूरा सहयोग मिला। आरोप है कि तीनों वार्डन लड़कियों को जबरन आरोपी के पास ले जाती थीं। इस तरह यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि संस्थान की व्यवस्था में मौजूद मिलीभगत का भी है।

यह प्रकरण एक बार फिर उस सच्चाई को उजागर करता है कि कैसे धार्मिक या शैक्षिक आवरण में छिपकर कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ साधते हैं। यह समाज और कानून दोनों के लिए चुनौती है।

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