नेशनल हेराल्ड केस कांग्रेस के आला नेताओं की असलियत को दिखाता है। पांच हजार करोड़ की प्रापर्टी को पचास लाख में खरीदे जाने का आरोप है। इस मामले में कांग्रेस नेतृत्व मामले की जांच से बचने के लिए बेशक जितना मर्जी ड्रामा रच ले लेकिन उन्हें मुंह की खानी पड़ेगी। शुक्रवार को अंब में पत्रकारों को संबोधित करते हुए यह बात पूर्व विधायक एवं पूर्व भाजपा ज़िला अध्यक्ष बलबीर सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाली यह कहावत कांग्रेस नेतृत्व पर चरितार्थ हो रही है। उन्होंने कहा कि नेशनल हेराल्ड संस्था पर वर्ष 2012 में तत्कालीन मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री के कार्यकाल के समय मामला दर्ज हुआ था।लेकिन हिमाचल सरकार के उपमुख्यमंत्री तथ्यों से विपरीत बयानबाजी कर देश की जनता को बेवकूफ नहीं बना सकते।उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री सारे घटनाक्रम को बारीकी से अध्ययन कर फिर मीडिया में जाएं तो बेहतर होगा।उन्होंने कहा कि नेशनल हेराल्ड एक भारतीय अंग्रेजी भाषा का समाचार पत्र था। जिसकी स्थापना 1938 में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने की थी। उसका स्वामित्व राहुल गांधी और सोनिया गांधी की कंपनी यंग इंडिया लिमिटेड और विष्णु गोयल, रेखा गोयल की साझेदारी वाली फर्म शिवा पब्लिकेशन के पास था। वर्ष 2010 में यह संस्थान 90 करोड़ का कर्जदार हो गया। उन्होंने कहा कि उस समय पांच हजार कैपिटल वाली नेशनल हेराल्ड को खरीदने की बात आई तो उस समय कांग्रेस नेतृत्व के पास पांच लाख का कैपिटल था।न जाने किस तरीके से उन्होंने उस समय 50 लाख देकर पांच हज़ार करोड़ की कंपनी को अपने नाम कर लिया।उसके वाद नौ करोड़ के शेयर मार्केटिंग में बेच कर जो पैसे अर्जित किए उनका भी कोई हिसाब किताब नहीं लग पाया। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को सचेत करते हुए कहा कि केंद्र में तत्कालीन मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल में यह मामला दर्ज हुआ था। लेकिन अब यदि मामले की ईडी जांच कर रही है तो कांग्रेस नेतृत्व के पेट में मरोड़ क्यों लग रहे है। इस मौके पर दोनों मंडलों के अध्यक्ष कृपाल सिंह, विनय शर्मा, महासचिव कुलदीप ठाकुर, संजय कुमार, अशोक ठाकुर, जगदेव सिंह शास्त्री, हरेंद्र सिंह, बालकृष्ण मौजूद रहे।