सीटू और हिमाचल किसान सभा की ओर से जिलाधीश कार्यालय सोलन में एक संयुक्त मजदूर-किसान प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह विरोध देशभर में चल रहे आंदोलन का हिस्सा था, जिसमें श्रमिकों और किसानों की मूलभूत आर्थिक-सामाजिक अधिकारों पर हो रहे हमलों के खिलाफ आवाज बुलंद की गई। इस दौरान लेबर कोड की प्रतियां भी जलाई गईं। सीटू नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 21 नवंबर को बिना परामर्श, बिना भारतीय श्रम सम्मेलन बुलाए, चारों लेबर कोड्स को अचानक अधिसूचित कर दिया। जो न्यूनतम वेतन, सुरक्षित रोजगार, कार्य समय, यूनियन बनाने का अधिकार और सामाजिक सुरक्षा जैसे बुनियादी अधिकारों को कमजोर करते हैं। इस दौरान उपायुक्त के माध्यम से संगठनों ने भारत की राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा जिसमें विस्तृत प्रतिवेदन में एमएसपी की कानूनी गारंटी, ओपीएस बहाली, निजीकरण पर रोक, पूर्ण ऋण माफी, सामाजिक सुरक्षा, खाद्य-सुरक्षा और श्रम अधिकारों की बहाली की प्रमुख मांगें उठाई गईं।