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Sirmaur: शिलाई में किसानों-बागवानों को बताईं प्राकृतिक खेती की विधियां, पंचायत मैदान में कृषि विभाग ने आयोजित किया किसान मेला

शिलाई पंचायत मैदान में कृषि विभाग की ओर से किसान मेले का आयोजन किया गया। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने मेले में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। इस दौरान उद्योगमंत्री ने मेले के दौरान लगाई गई कृषि एवं बागवानी की अत्याधुनिक और परंपरागत तकनीकों की प्रदर्शनियों का अवलोकन किया। इन प्रदर्शनियों ने न केवल किसानों को नई तकनीकों से रुबरू करवाया, बल्कि किसानों-बागवानों को प्राकृतिक खेती की तरफ प्रेरित किया। कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के प्रदेश निदेशक रविंदर जसरोटिया ने मुख्य अतिथि को शाल, टोपी, स्मृतिचिन्ह और परंपरागत तलवार भेंट कर सम्मानित किया। किसान मेले का उद्देश्य प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना रहा। इस अवसर पर किसानों को जैविक खेती एवं संसाधनों की विस्तृत प्रदान की गई, जो न केवल धरती मां को बचाते हैं, बल्कि उपज को भी शुद्ध और पोषण से भरपूर बनाते हैं। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि बीजामृत बीजों को रोगमुक्त करने की प्राचीन विधि है। इसका किसानों-बागवानों को विशेष ध्यान रखना होगा। जीवामृत मिट्टी में जीवन भरने वाला अमृत है। घन जीवामृत ठोस रूप में जैव उर्वरक है, जिसका सही मात्रा इस्तेमाल आवश्यक है। नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, दरेकास्त्र, कीट नियंत्रण की देसी वैज्ञानिक पद्धतियां है। किसान मेले में प्राकृतिक खेती से जुड़े किसान चमेल सिंह और चतर सिंह ने अपने अनुभव साझा किए। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल एक पद्धति नहीं, एक जीवन दर्शन है। यह हमारी मिट्टी, हमारे स्वास्थ्य, और हमारे भविष्य को बचाने की दिशा में एक संकल्प है। उन्होंने किसानों से जैविक खेती अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कृषि एवं बागवानी विभाग की ओर से चलाई जा रही विभिन्न प्रकार की योजनाओं की जानकारी प्रदान की। मेले में शिलाई और आसपास के क्षेत्रों के किसानों ने भाग लिया।

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