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VIDEO : शिमला की सेब तो सिरमौर की पहचान बनेगा अमरूद

देश व प्रदेश में जैसे शिमला जिला की पहचान सेब से होती है तो वहीं आने वाले समय अमरूद सिरमौर जिला की पहचान बनने वाला है। अमरूद को बढ़ावा देने को लेकर बागवानी विभाग द्वारा काम शुरू कर दिया गया है और जिला सिरमौर में किसानों को अब बागवानी से जोड़ा जा रहा है ताकि उन्हें अतिरिक्त आमदनी हो सके। इसके लिए बागवानी विभाग जिला सिरमौर द्वारा एशियन डेवेल्पमेंट बैंक के सहयोग से जिला में शिवा योजना के तहत 4 हजार हैक्टेयर भूमि पर फलदार पौधों को लगाया जा रहा है। बता दें कि सिरमौर जिला समशितोष्ण मौसम की श्रेणी में आता है और जिला का मौसम अमरूद की फसल के लिए उपयुक्त है। जिसके बाद शिवा पोजेक्ट के तहत जिला को अमरूद की फसल के लिए चयनियत किया गया है। योजना के तहत जिला के पांवटा साहिब व नाहन के क्षेत्रों को शुरूआती चरण में शामिल किया गया है। यहां बागवानी विभाग की तरफ से 12 फ्रंट लाईन डेमोस्ट्रेशन (एफएलडी) स्थापित किए गए हैं। 11.20 बीघा भूमि पर स्थापित किए गए इन एफएलडी में 17822 पौधे लगाए गए हैं। अलग अलग क्षेत्रों में स्थापित किए गए इन एफएलडी में बागवानों को जानकारी दी जा रही है और पुरी योजना को लेकर प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला सिरमौर में अमरूद के बगीचे तैयार करने को लेकर प्रथम चरण में भूमि का चयन कर लिया गया है। जिसके बाद अब भूमि पर पौध रोपण का कार्य शुरू किया गया है। विभाग के अनुसार किसी एक क्षेत्र में कम से कम 10-12 किसानों को एक साथ जोड़ा जा रहा है जिनकी जमीनें एक साथ लगती हैं। किसानों की कुल कम से कम 120 बीघा भूमि होनी अनिवार्य है। जहां 11 हजार के करीब पौधे लगाए जाऐंगे। जिनसे 3 से 4 साल बाद किसानों को बेहतर फल मिलेगा और उनकी आमदनी में काफी वृद्धि हो सकती है। विभाग के अनुसार उक्त योजना के तहत जल शक्ति विभाग को अलग से अनुदान दिया गया है ताकि किसानों बागवानों को बेहतर सुविधा मिल सके। अनुदान देने का मकसद यही है कि संबधित क्लस्टर में जल शक्ति विभाग सिंचाई को लेकर पर्याप्त व्यवस्था करेगा ताकि योजना के तहत लगाए गए बगीचों को सिंचाई की कमी न रहे। बता दें कि जिला में अधिकतर क्षेत्रों में सिंचाई की कमी रहती है और यहां किसान खेती के लिए बारिश पर निर्भर रहते हैं। इसी को देखते हुए यहां सिंचाई को लेकर पहले ही ध्यान रखा गया है। इसके अलावा योजना के तहत बगीचों की पुरी तरह से तारबाड़ करने को लेकर भी काम किया जाता है। विभाग के अनुसार योजना के बाद फलों की काफी पैदावार होती है तो यदि बागवान फलों को प्रोसेस कर बेचना चाहे तो इसके लिए भी योजना में प्रावधान किया गया है। जिससे बागवान को अधिक मुनाफा होगा। यूनिट स्थापित करने को लेकर योजना में पहले ही प्रावधान किया गया है। उपनिदेशक बागवानी विभाग सिरमौर एसकेएस बक्शी ने कहा कि सिरमौर में शिवा योजना के तहत एशियन डेवेल्पमेंट बैंक के सहयोग से 4 हजार हेक्टेयर भूमि पर अमरूद के बगीचे तैयार किए जाएंगे। योजना के प्रथम चरण में भूमि का चयन कर लिया गया है और पौध रोपण का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। नाहन व पांवटा साहिब में 12 एफएलडी स्थापित किए गए हैं। जिनसे किसानों को जागरूक किया जा रहा है।

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