हिमाचल प्रदेश सरकार की राजीव गांधी वन संवर्धन योजना पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की दिशा में प्रभावी पहल बनकर उभर रही है। योजना के तहत महिला मंडलों और युवक मंडलों को पौधरोपण एवं संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है, जिससे जनभागीदारी के माध्यम से हरित हिमाचल के लक्ष्य को गति मिल रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान मंडी वन मंडल में आठ महिला मंडलों और दो युवक मंडलों के सहयोग से 20 हेक्टेयर क्षेत्र में 16 हजार पौधे लगाए गए। वन विभाग ने पौधरोपण और संरक्षण के लिए प्रति हेक्टेयर 1.20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई। पौधरोपण अभियान में बान, देवदार, दाडू, कचनार, शीशम, आंवला, बेहड़ा, रीठा, जामुन और पाजा जैसी स्थानीय एवं बहुपयोगी प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई। पौधों का वितरण कोटली, कटौला, मंडी, द्रंग और पनारसा रेंज की विभिन्न नर्सरियों से किया गया। वन विभाग ने माइक्रो प्लान के आधार पर वैज्ञानिक पद्धति से पौधरोपण कराया, ताकि पौधों की बेहतर वृद्धि और दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। विभाग का मानना है कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी से पौधों के जीवित रहने की दर भी बढ़ेगी। वन वृत्त मंडी में योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 121.5 हेक्टेयर क्षेत्र के कार्य स्वीकृत किए गए, जिनके लिए करीब 1.24 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया। इनमें से 102.5 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण का कार्य पूरा हो चुका है। योजना के तहत 74 महिला एवं युवक मंडलों को लाभान्वित करते हुए 1,22,857 पौधे वितरित किए गए। योजना से जुड़े प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार जताते हुए कहा कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को रोजगार तथा प्रकृति से जुड़ने का अवसर भी प्रदान कर रही है।