लाहौल में पहाड़ जमते ही हिमालयन आईबैक्स (टंगरोल) प्यास बुझाने के लिए रिहायशी इलाकों की ओर आ रहे हैं। इन जीवों में अब शिकार का खौफ नहीं है। ऐसे में यह बेखौफ रिहायशी इलाकों में घूमते दिखे जा रहे हैं, जो यहां आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण बन गए हैं। आमतौर पर समुंदरतल से 10 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर पाए जाने वाले हिमालयन आईबेक्स प्यास के कारण अब रिहायशी इलाकों में लोगों के मोबाइल कैमरों में कैद हो रहे हैं। इन दिनों आइबेक्स के झुंड तांदी स्थित छुरपक पेट्रोल पंप के आसपास, स्तींगरी हेलीपैड के इर्दगिर्द सहित घाटी के कई इलाकों में सड़कों में भी बेखौफ घूमते देखेजा रहे हैं। वन विभाग लाहौल ने इन वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर नियमित पेट्रोलिंग शुरू कर दी है। लाहौल वन विभाग के फाइलों में डेढ़ दशकों से अधिक समय से अवैध शिकार का कोई मामला सामने नहीं है। लिहाजा यह वन्यजीव बेखौफ है। जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी में महिला मंडलों की सामूहिक प्रयास से वन कटान पर पावंदी से जहां अब वनों का दायरा बढ़ रहा है, वहीं वन्यजीवों के शिकार पर पाबंदी ने भी उन्हें बेखौफ विचरने की स्वतंत्रता प्रदान की है। लाहौल वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) अनिकेत वानवे ने कहा कि पहाड़ों में ठंड के चलते पानी जम गए हैं, लिहाजा यह वन्यजीव प्यास बुझाने के लिए निचले क्षेत्रों की ओर आ रहे हैं। लोग वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचाएं।