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यमुनानगर में ग्रामीणों और किसानों ने जताया विरोध, 10 दिन में प्लांट बंद न हुआ तो हाईवे जाम की चेतावनी

गांव धौड़ंग में करीब 16 लाख रुपये की लागत से बनाए गए प्लास्टिक कचरा निस्तारण प्लांट का उद्घाटन हुए अभी दो दिन ही हुए हैं कि इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है। किसानों और ग्रामीणों ने प्लांट के संचालन का विरोध करते हुए इसे बंद करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि गांव में कचरा रीसाइक्लिंग प्लांट लगने से गंदगी और प्रदूषण बढ़ेगा, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वीरवार को बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण प्लांट के बाहर एकत्रित हुए और जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो वे यमुनानगर-सहारनपुर स्टेट हाईवे को जाम करने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। करीब एक घंटे तक किसानों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बातचीत चली। इस दौरान अधिकारियों ने ग्रामीणों को प्लांट का निरीक्षण भी करवाया और उन्हें समझाने का प्रयास किया कि यहां किसी प्रकार का कचरा नहीं डाला जाएगा। अधिकारियों के अनुसार इस प्लांट में केवल प्लास्टिक को रीसाइक्लिंग के लिए प्रोसेस किया जाएगा, जिससे न तो गंदगी फैलेगी और न ही प्रदूषण का खतरा रहेगा। इसके बावजूद ग्रामीण और किसान अपनी मांग पर अड़े रहे। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेताओं ने भी प्लांट को लेकर कड़ा विरोध जताते हुए प्रशासन को 10 दिनों के भीतर इसे बंद करने का अल्टीमेटम दिया है। इस संबंध में किसानों की ओर से अधिकारियों को एक ज्ञापन भी सौंपा गया। भाकियू नेता सुभाष गुर्जर ने कहा कि गांव में किसी भी प्रकार का नया प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले ग्रामीणों को इसकी जानकारी देना आवश्यक होता है, लेकिन इस मामले में प्रशासन ने ऐसा नहीं किया। उनका आरोप है कि मंगलवार को जिला प्रशासन की ओर से डीसी चुपचाप गांव में पहुंचीं और प्लांट का उद्घाटन कर दिया, जिसकी सूचना ग्रामीणों को पहले नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि यदि प्लांट शुरू हो जाता है तो आसपास के क्षेत्रों से प्लास्टिक कचरा गांव में लाया जाएगा, जिससे गंदगी और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। किसानों का कहना है कि धौड़ंग पहले से ही घनी आबादी वाला गांव है और यहां कई उद्योग और फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं, जिनके कारण प्रदूषण की समस्या पहले ही बनी हुई है। ऐसे में कचरा रीसाइक्लिंग प्लांट से स्थिति और खराब होने की आशंका है। विरोध की सूचना मिलने पर अंडर ट्रेनिंग आईएएस सुमन यादव और बीडीपीओ दीपांशु जिंदल भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। पुलिस की मौजूदगी में स्थिति को शांत कराया गया। बीडीपीओ दीपांशु जिंदल ने बताया कि प्लांट को लेकर ग्रामीणों में गलतफहमी है। यहां केवल चुनिंदा प्लास्टिक को रीसाइकिल किया जाएगा और इससे गांव या पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि किसानों की आपत्तियों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दिया गया है और जल्द ही इस विषय पर उचित निर्णय लिया जाएगा। प्लांट की लागत लगभग लागत 16 लाख रूपए आई है और सरकार द्वारा मुफ्त में मशीनें लगाई गई है, पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए सरकार द्वारा ब्लॉक स्तर पर लगाया जा रहे प्लास्टिक मैनेजमेंट प्लांट लगाए जा रहे हैं। ऐसा ही एक प्लांट रादौर के गांव धौलरा में लगाया गया है जिससे गांव में फैली गंदगी और प्लास्टिक का निस्तारण किया जा रहा है।

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