हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौट रहे शिवभक्तों के जत्थे अब अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। कांवड़ियों ने बताया कि यात्रा के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रशासन की ओर से सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, लेकिन कुछ मार्गों पर सड़क की खराब हालत और रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ा। कांवड़ियों ने विशेषकर कलानौर से अग्रसेन कॉलेज की ओर जाने वाले मार्ग पर व्यवस्था सुधारने की जरूरत बताई। गांव मुबारिकपुर, डेराबस्सी निवासी अभिषेक ने बताया कि वह साथियों के साथ पिछले तीन दिन से पैदल यात्रा कर रहे हैं। रास्ते में यूपी और उत्तराखंड पुलिस का अच्छा सहयोग मिला। हरियाणा में भी कई स्थानों पर सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, लेकिन कुछ जगह सड़क खराब होने और लाइटों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से दिक्कत हुई। मुबारिकपुर निवासी सन्नी ने बताया कि उनकी टीम में 10 लोग हैं और वह पिछले 12 वर्षों से कांवड़ लेने हरिद्वार जा रहे हैं। पिछले दो वर्षों से वे पैदल यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भोलेनाथ से जो भी मन्नत मांगी, वह पूरी हुई। इसी आस्था के चलते हर साल कांवड़ लेने जाने का सिलसिला जारी रहेगा। कांवड़िये रोहित ने बताया कि वह मुबारिकपुर से हैं और 6 अगस्त को हरिद्वार से कांवड़ लेकर चले थे। 11 अगस्त तक अपने गंतव्य तक पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान अधिकतर जगह व्यवस्थाएं ठीक रहीं। अंबाला कैंट निवासी दिपांशु ने बताया कि वे भी 6 अगस्त को हरिद्वार से कांवड़ लेकर चले थे। अधिकांश रास्ता ठीक रहा, लेकिन कलानौर से अग्रसेन कॉलेज की ओर जाने वाले मार्ग पर सड़क और रोशनी की व्यवस्था खराब मिली। कलानौर बॉर्डर पर पुलिस की व्यवस्था भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं थी। रास्ते की जानकारी लेने पर भी उचित मार्गदर्शन नहीं मिला। उन्होंने बताया कि यहां वाहन की चपेट में आने से बाल-बाल बचे। दिपांशु पिछले चार वर्षों से कांवड़ ला रहे हैं और आगे भी यह यात्रा जारी रखने की इच्छा रखते हैं। अंशुल ने बताया कि उन्हें अंबाला जाना है। वह पहली बार हरिद्वार गए और कांवड़ लेकर लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि भोलेनाथ की कृपा से उनकी मन्नतें पूरी हो रही हैं, इसलिए कांवड़ यात्रा को लेकर उत्साह बना हुआ है।