गांव बरोदा के सरकारी स्कूलों की तस्वीर विकास और बदहाली के बीच झूलती नजर आती है। एक ओर आधुनिक भवन और स्मार्ट सुविधाएं हैं तो दूसरी ओर बायोलॉजी टीचर की कमी, जलभराव और स्वच्छता जैसी समस्याएं बच्चों के भविष्य पर असर डाल रही हैं। बारिश में विद्यार्थियों को पानी के बीच से स्कूल पहुंचना पड़ता है। गांव बरोदा में संचालित पांच सरकारी स्कूल राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, दो उच्च विद्यालय और एक प्राथमिक पाठशाला कागजों में सुसज्जित दिखते हैं, लेकिन जमीनी हालात कई सवाल खड़े कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि सरकार ने स्कूलों में सुविधाएं तो उपलब्ध कराई हैं, मगर उनके रखरखाव और नियमित संचालन के लिए पर्याप्त बजट नहीं दिया जा रहा। सबसे गंभीर समस्या साइंस की मेडिकल स्ट्रीम में बायोलॉजी शिक्षक की कमी है। दो वर्ष से बायोलॉजी का कोई प्राध्यापक नहीं है, जिससे मेडिकल की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। स्कूल प्रबंधन के अनुसार नया भवन बनने के बावजूद परिसर चारों ओर से नीचा है। बारिश के दौरान यहां करीब तीन फुट तक पानी भर जाता है, जिससे बच्चों को रोजाना पानी के बीच से होकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। यह स्थिति खासकर छोटे बच्चों के लिए जोखिम भरी बन जाती है। स्वच्छता के मोर्चे पर भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। मिड-डे मील की रसोई शौचालय के पास बनी हुई है, जिसे स्थानांतरित करने के प्रयास कई बार किए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। इससे स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड और अन्य आधुनिक संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन चौकीदार की व्यवस्था न होने से उपकरणों की सुरक्षा को लेकर स्टाफ में लगातार चिंता बनी रहती है। इन चुनौतियों के बावजूद विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की 12वीं कक्षा की चार छात्राओं ने वर्ष 2024-25 में 90 फीसदी से अधिक अंक हासिल कर सरकार की ओर से मिलने वाली 1.11 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त की। चारों छात्राओं को कुल 4.44 लाख रुपये मिले। वहीं 2025-26 में भी एक छात्रा ने यह उपलब्धि दोहराई है। बच्चों में पढ़ने की लगन और क्षमता की कोई कमी नहीं है, लेकिन शिक्षकों की कमी और आधारभूत समस्याएं उनकी प्रगति में बाधा बन रही हैं। स्कूलों में नियमित और पूर्ण स्टाफ उपलब्ध हो जाए तो बच्चे और बेहतर परिणाम दे सकते हैं।