भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) ने 23 मार्च से किसान मजदुर जनक्रांति रैली शुरू करने का ऐलान किया है। संगठन के नेताओं ने कहा कि किसानों की कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं, इसलिए अब आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। रैली का न्योता देने आए भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने बताया कि उनकी मुख्य मांग एमएसपी पर गारंटी कानून बनाने की है, ताकि किसानों को अपनी फसल का तय दाम मिल सके। इसके साथ ही किसानों के कर्ज माफ करने और देश के सभी लोगों के लिए शिक्षा व चिकित्सा सुविधाएं मुफ्त करने की मांग भी उठाई गई है। उन्होंने कहा कि अभी ये सुविधाएं सिर्फ सरकारी अधिकारियों और नेताओं को ही मिलती हैं। उन्होंने नए बिजली बिल और बीज बिल पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इन फैसलों से किसानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। सबसे बड़ा मुद्दा अमेरिका के साथ होने वाली ट्रेड डील को बताया गया। नेताओं ने कहा कि मार्च के बाद इस पर हस्ताक्षर होने की संभावना है और यह पहले आए तीन कृषि कानूनों से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है। उनका कहना है कि अगर यह डील हुई तो अमेरिका का कृषि उत्पाद भारत में बड़े स्तर पर आएगा। जिससे यहां के किसानों का उत्पाद नहीं बिक पायेगा। उन्होंने कहा कि भारत में ज्यादातर किसान 18 एकड़ से कम जमीन वाले हैं, जबकि अमेरिका में हजारों एकड़ जमीन वाले किसान खेती करते हैं। ऐसे में भारतीय किसान उनका मुकाबला नहीं कर पाएंगे और उन्हें खेती छोड़नी पड़ सकती है। इससे करोड़ों किसान और खेत मजदूर बेरोजगार हो सकते हैं। किसान नेताओं ने हरियाणा सरकार से भी मांग की कि राजस्थान सरकार की तरह किसानों को फसलों पर बोनस दिया जाए। इन्हीं मुद्दों को लेकर 23 मार्च को शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहीदी दिवस पर पिपली (कुरुक्षेत्र) में बड़ी रैली होगी। इसके प्रचार के लिए किसान संगठन के नेता क्षेत्र में आकर लोगों को रैली में शामिल होने का आह्वान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ संगठन ट्रेड डील पर हस्ताक्षर होने के बाद आंदोलन की बात कर रहे हैं, लेकिन उनका मानना है कि इस समझौते पर हस्ताक्षर होने ही नहीं दिए जाने चाहिए। साथ ही किसानों को फसलों पर अच्छा बोनस मिलना चाहिए, जैसा राजस्थान में दिया जा रहा है।