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महेंद्रगढ़ में किसानों को रास आ रही है बैक-टू बैक सरसों थ्रेसिंग मशीन

पिछले एक सप्ताह से मौसम में चल रहे बदलावों के बीच बैक-टू बैक सरसों थ्रेसिंग मशीन किसानों को काफी रास आ रही है। महज दो घंटे की अच्छी धूप खिलने के बाद किसान सरसों की थ्रेसिंग इस मशीन से करा रहे हैं। मंगलवार को सुबह से अच्छी धूप खिलने के बाद किसानों ने सरसों की तेजी से थ्रेसिंग शुरू कर दी है। मंडियों में नमी व अन्य प्रकार की परेशानियों से बचने के लिए किसान खेतों में ही सरसों को सुखाकर इस मशीन के माध्यम से तेजी से कढ़ाई में जुटे हुए हैं। इस मशीन से सरसों की कटाई के बाद थ्रेसिंग को लेकर किसानों को होने वाली परेशानियां अब काफी हद तक कम होती नजर आ रही हैं। क्षेत्र में इन दिनों बैक-टू-बैक सरसों थ्रेसिंग मशीन किसानों के लिए राहत का बड़ा साधन बन गई है। साथ ही किसान की खलिहान बनाने व अतिरिक्त भागदौड़ भी बच रही है। आधुनिक कृषि तकनीक का यह प्रयोग किसानों के लिए समय, श्रम और लागत में बड़ी राहत है, और यही वजह है कि क्षेत्र के अधिकतर किसान अब इस मशीन का उपयोग करने लगे हैं। थ्रेसिंग के बाद निकलने वाले भूसे (पदाड़ी) को भी सीधे ट्राली में पैक कर ईंट भट्ठों व फैक्ट्रीयों में पहुंचाई जा रही है। पिछले एक सप्ताह से मौसम में चल रहे बदलावों ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी थी। अधिकांश किसानों ने परेशानी से बचने के लिए सरसों के खलिहान बनाने की बजाए पसार में सूखने के लिए छोड़ी दी। इस मशीन से महज एक घंटे में आठ मजदूरों की सहायता से सरसों की थ्रेसिंग हो जाती है। दस क्विंटल क्षमता का स्टोरेज टैंक है। टैंक भरने के बाद किसान सीधे अपने वाहन में उपज डालकर घर ले जाता है। किसान को सरसों के अवशेषों के रूप में निकलने वाले भूसे की भी कीमत मिल रही है। - संदीप यादव, मशीन संचालक। यह मशीन किसान के लिए बहुत फायदेमंद है। एक घंटे में ही एक एकड़ की थ्रेसिंग हो जाती है और उपज सीधे घर तक पहुंच जाती है। इससे मजदूरी और ढुलाई का खर्च बच रहा है। अवशेषों की भी कीमत किसान को मिल रही है। पहले खेतों में छोटी-छोटी ढेरियां बनाकर सरसों सुखानी पड़ती थी और फिर खलिहान में ले जाकर थ्रेसिंग करनी होती थी, वहीं अब इसकी जरूरत भी काफी हद तक खत्म हो गई है, जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है। चार एकड़ में सरसों थी मंगलवार को ही थ्रेसिंग कराई है। - संदीप शास्त्री, किसान निवासी झूक। सुखी सरसों की फसल को चलती मशीन से भी निकाला जा सकता है। उपज को सीधे किसान के ट्रेक्टर-ट्राली में भी भर रही है जिससे किसान की अतिरिक्त भागदौड़ से भी छुटकारा मिल रहा है। महज एक घंटे के समय में आसानी से एक एकड़ में सुखने को छोड़ी फसल की थ्रेसिंग की जा सकती है। - ज्ञानेंद्र सिंह, निवासी कनीना।

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