नारनौल। अलवर बहरोड़ स्टेट हाईवे 14 पर सोडावास में साल 1990 में साबी नदी पर बने पुल की हालत जर्जर हो चुकी है। अब यह पुल कई जगहों से टूट गया है। इसके चलते अलवर प्रशासन की ओर से पुल पर भारी वाहनों सहित सभी का प्रवेश बंद कर दिया गया है। हालांकि प्रशासन की ओर से आने जाने के लिए एक कच्चे रास्ते का निर्माण कराया गया है। गंतव्य पर देरी से पहुंच रहीं बसें: अब छोटे बड़े सभी वाहन इसी रास्ते से होकर गुजर रहे हैं। नारनौल से अलवर व अलवर से नारनौल के लिए सुबह से शाम तक कई रोडवेज बसों का संचालन किया जाता है। ऐसे में हरियाणा रोडवेज की रफ्तार भी पुल के टूटने के कारण धीमी पड़ गई है। साथ ही यह रास्ता संकरा होने के कारण अक्सर जाम लगने से सवारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुल टूटने के कारण रोडवेज 30 से 40 मिनट की देरी से पहुंच रहीं हैं। 36 साल पुराना है पुल: साल 1990 में साबी नदी पर इस पुल का निर्माण कराया गया था। करीब 36 साल पहले बने इस पुल की हालत देखरेख की अनदेखी व लगातार बढ़ते यातायात के दबाव के कारण खस्ता हो चुकी है। इस पुल से दिनभर में हजारों छोटे बड़े वाहन गुजरते थे। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा होने से पहले ही प्रशासन ने इस पर वाहनों का प्रवेश वर्जित कर दिया है। नदी से होकर गुजर रहे वाहन: प्रशासन की ओर से साबी नदी में से एक बस्ती से होते हुए सोडावास तक एक कच्चे रास्ते का निर्माण कराया गया है। लेकिन इस रास्ते की चौड़ाई कम होने के कारण यहां जाम लग जाता है। इसी के चलते नारनौल से अलवर व अलवर से नारनौल आने जाने वाली बसें अपने निर्धारित समय से 30 से 40 मिनट देरी से पहुंच रही हैं। साथ ही बस में सफर करने वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वर्जन: करीब 10 दिन पहले साबी नदी पर बना पुल टूट गया था। हालांकि राजस्थान प्रशासन की ओर से एक कच्चा रास्ता बनाया गया है। रास्ते की चौड़ाई कम होने के चलते बस जाम में फंस जाती है। जिसके कारण यात्रियों को थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद इसके डिपो से सारी गाड़ियां अपने अपने निर्धारित समय पर अलवर आ जा रही हैं। सतीश कुमार, मुख्य निरीक्षक, डिपो नारनौल।