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सिद्ध बाबा कांशीगिरि महाराज मंदिर में कार्तिक मास की कथा आयोजित

झज्जर। सिद्ध बाबा कांशीगिरि महाराज मंदिर के प्रांगण में महिला संकीर्तन मंडली के तत्वावधान में चल रही दूसरी कार्तिक मास की कथा में कथा वाचक पंडित पवन कौशिक ने कहा कि संसार भगवान का एक सुंदर बगीचा हैं, जिसमें 84 लाख योनियों के रूप में विभिन्न प्रकार के फूल खिलते है। प्रत्येक जीव का अपना महत्व हैं। महिला संकीर्तन मंडली द्वारा संतोष हंस,रोजी नारंग, इंदू भूगड़ा ने बांके बिहारी मुझकों देना सहारा..संध्या आर्य, किरण अरोड़ा ने मेरे धनश्याम प्यारे कन्हैया किस जगह जलवा नही है..भजन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। कथा के विश्राम पर भगवान की आरती की गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस मौके पर प्रधान सुधांशु हंस, उपप्रधान राजकुमार चुघ रमेश लखेरा, नारायणी सरदाना, शीला देवी चुघ, सन्तोष शर्मा, विशन वधवा, माधवी, सुनीति, पूजा, कैलाश सहित अन्य मौजूद रहे। पंडित पवन कौशिक ने कहानी बताते हुए कहा कि एक बुढ़िया कार्तिक का व्रत करती थी। उसके लिए कृष्ण भगवान खिचड़ी का कटोरा रख जाते। और बुढ़िया व्रत खोल लेती थी। पड़ोसन देखकर जलती कि इसका कोई नहीं फिर भी इसकी खिचड़ी खाने के लिए मिल जाती है। एक दिन बुढ़िया कार्तिक नहाने गंगाजी गई थी। भगवान आए और खिचड़ी का बैला मकान में रख गए। पड़ोसन ने खिचड़ी का बैला उठाकर पिछवाड़े फेंक दिया। कार्तिक आई तो खिचड़ी का बैला देखकर तो उसको कहीं नहीं मिला। वह भूखी रही और कहने लगी कि कहां गई मेरी खिचड़ी, कहाँ गया मेरा बैला। पिछवाड़े में उस खिचड़ी के दो फूल बन गए। राजा आया और फूल तोड़कर ले गया। दोनों फूल रानी ने सूंघे तो रानी को गर्भ रह गया। राजा-रानी की कोई संतान नहीं थी। फूल सूंघने से रानी को दो लड़के पैदा हो गए।

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