जिले के रोहेड़ा गांव निवासी लांस नायक नरेंद्र सिंह सिंधु के कुलगाम में शहीद होने के बाद गांव में शोक का माहौल है। जैसे ही सैनिक के बलिदान की सूचना गांव में पहुंची, शोक की लहर दौड़ गई और गांव में सन्नाटा पसर गया। पूर्व सैनिक वेलफेयर एसोसिएशन की टीम गांव पहुंची और परिवार को सांत्वना दी। एसोसिएशन के जिला प्रधान जगजीत सिंह फौजी ने बताया कि कागजी कार्रवाई में देरी के कारण मंगलवार को नरेंद्र का पार्थिव शरीर कैथल नहीं पहुंच सका। फिर भी, गांव में विभिन्न जगहों से लोग नरेंद्र को श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। परिजनों के मुताबिक नरेंद्र करीब आठ साल पहले सेना में भर्ती हुए थे। वे राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे और चार साल पहले उनकी पोस्टिंग श्रीनगर में हुई थी। नरेंद्र अविवाहित थे, और परिवार उनकी शादी की योजना बना रहा था। उनका जल्द ही जम्मू-कश्मीर से तबादला होने वाला था, जिसके बाद शादी की तैयारी थी। नरेंद्र अंतिम बार साढ़े तीन महीने पहले छुट्टी पर घर आए थे। करीब एक महीने घर रहने के बाद, ढाई महीने पहले वे ड्यूटी पर लौट गए। सोमवार को उनके शहीद होने की सूचना कैथल पहुंची, जिसके बाद से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। नरेंद्र ने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी और फिर सेना की तैयारी कर भर्ती हो गए थे। उनके परिवार में पिता दलबीर सिंह (किसान), माता रोशनी देवी (गृहिणी), दो बहनें (जिनकी शादी हो चुकी है), और एक छोटा भाई वीरेंद्र है।