महाबीर स्टेडियम में करीब 4.50 लाख रुपये खर्च कर बरसाती पानी की निकासी के लिए एक पंपसेट सिस्टम लगाया गया था। जो सिस्टम बरसाती पानी निकासी के लिए लगाया गया था वही सिस्टम महाबीर स्टेडियम के लिए मुसीबत बन गया। सरकारी विभागों ने करीब साढ़े लाख रुपये खर्च कर मुसीबत मोल ले ली। इस पाइप के जरिए पानी निकासी होनी थी, सिस्टम को चलाया नहीं गया। जिस कारण इन पाइप से ही बाहर सड़क व कालोनियों का पानी महाबीर स्टेडियम में घुस गया। इसी लापरवाही के कारण तालाब बने महाबीर स्टेडियम में 5 दिन मोटर चलाने के बाद अब स्टेडियम को खाली किया जा सका है। इसके बाद भी स्टेडियम में जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह होना संभव नहीं दिख रहा। महाबीर स्टेडियम में बारिश के बाद दो से चार फीट तक पानी भर जाता है। जिसके बाद स्टेडियम में अभ्यास करने वाले 300 से 400 खिलाड़ियों को स्टेडियम से बाहर जाना पड़ता है। खिलाड़ियों का अभ्यास बंद हो जाता है। पिछले एक महीने से हो रही बारिश के बाद लगभग हर बार ऐसी ही स्थिति बन रही है। स्टेडियम से पानी निकासी के लिए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग हर बार मोटर लगा कर पानी निकासी कराता है। तीन चार साल पहले महाबीर स्टेडियम में इतना पानी नहीं भरता था। स्टेडियम में अभ्यास कराने वाले मोहित यादव, विक्रम सिंह, रवि श्योराण, अनु पूनिया ने बताया पहले स्टेडियम में पानी भरता तो एक दिन बाद ही खाली हो जाता था। अब तीन से चार फीट पानी भर रहा है। जिसको निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कई दिन बाद भी पानी की निकासी नहीं हो पा रही। दरअसल पानी निकासी के लिए खेल विभाग ने जनस्वास्थ्य विभाग को वर्ष 2018 में साढ़े चार लाख रुपये दिए थे। जिससे महाबीर स्टेडियम से पाइप दबा कर पिछले गेट से मधुबन पार्क में पानी निकासी की प्लानिंग थी। महाबीर स्टेडियम में एक पंप सेट लगाया गया था। इस पंपसेट के जरिए पानी को लिफ्ट कर सीवरेज- ड्रेनेज में डाला जाना था। बीच में कोविड आने के बाद जनस्वास्थ्य विभाग ने 2023 में इस काम को पूरा किया। जनस्वास्थ्य विभाग न इस सिस्टम को हैंडओवर करने के लिए विभाग ने पत्र लिखे लेकिन खेल विभाग ने कभी इसे लिया नहीं। इस बार बारिश के सीजन में पंपसेट को चालू नहीं किया गया। जिन पाइप के जरिए पानी स्टेडियम से बाहर निकलना था उन पाइप के जरिए ही पानी वापस स्टेडियम में घुसने लगा है। पंपसेट को टेकओवर करने का मामला मेरे आने से पहले का है। हमारे पास टेक्निकल मेनपावर नहीं है। जब जनस्वास्थ्य विभाग पूरे शहर में पानी निकासी कराता है तो स्टेडियम से पानी निकासी का जिम्मा भी उनके पास ही होना चाहिए। स्टेडियम में बाहर से पानी कहां से आ रहा है यह जनस्वास्थ्य विभाग ही बता सकता है। बाहर का पानी स्टेडियम में न आए इसके लिए हम कुछ गेट के पास कंकरीट की दीवार बनाएंगे। -नरेश कुमार, जिला खेल अधिकारी, हिसार अधिकारी के अनुसार अपने क्षेत्र की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होती है। हमारे विभाग ने खेल विभाग से बजट लेकर पंपसेट लगाया था। खेल विभाग ने इसे टेकओवर नहीं किया। अगर समय पर इसे चलाया जाता तो शायद स्टेडियम में ऐसे हालात नहीं होते। खेल विभाग को अपने पंपसेट को टेक ओवर करना चाहिए। दूसरे एरिया का पानी भी स्टेडियम में घुस रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग दस हार्स पावर की दो अतिरिक्त मोटर लगा कर पानी निकलवा रहा है। -संजय दूहन, एसडीओ ,जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग हिसार।