हांसी से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित पाली गांव करीब तीन सदियों पुराना माना जाता है। इतिहास, सामाजिक सौहार्द और वीरता की मिसाल बना यह गांव आज भी अपने गौरवशाली अतीत और विकास की नई राह के कारण चर्चा में रहता है। बुजुर्गों के अनुसार इस गांव की बसावट करीब 300 वर्ष पहले हुई थी, जब जाट, ब्राह्मण और अनुसूचित जाति समाज के कुछ परिवार यहां आकर बसे। धीरे-धीरे यहां अन्य समुदायों के लोग भी बसते गए और गांव सामाजिक विविधता का प्रतीक बन गया। गांव के पूर्व सरपंच अमरीक सिंह बताते हैं कि समय के साथ यहां हिंदू और मुसलमान समुदाय भी साथ-साथ रहने लगे और लंबे समय तक गांव में आपसी भाईचारे और सौहार्द का माहौल रहा। हालांकि आजादी से पहले गांव के इतिहास में एक ऐसा विवाद भी सामने आया, जो बाद में इतिहास का हिस्सा बन गया। दरअसल, उस दौर में कुछ लोगों ने मुसलमानों को गांव से हटाने की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। यह मामला उस समय की लाहौर अदालत तक पहुंच गया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुसलमानों के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें गांव में रहने की अनुमति दी।