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VIDEO : हिसार में लघु सचिवालय के बाहर आशा वर्कर्स का धरना, सरकार के खिलाफ नारेबाजी

अपनी मांगों को लेकर आशा वर्कर्स ने बुधवार को लघु सचिवालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की। आशा वर्कर्स का कहना है कि सरकारें उनके कार्य को महत्वपूर्ण तो मानती हैं, लेकिन उनके हक और सुविधाओं की अनदेखी कर रही हैं। धरने का नेतृत्व यूनियन की जिला सचिव अनीता, उषा, सुमन, नीता, कृष्णा, सीमा धीरणवास, सीमा रावलवास, पूनम टोकस और सीटू के जिला सचिव मनोज कुमार ने किया। आशा वर्कर्स की प्रमुख मांगें:- 1. कटे हुए मानदेय का भुगतान: वर्ष 2023 की हड़ताल के दौरान 73 दिन का काटा गया मानदेय तुरंत दिया जाए। 2. नियमितीकरण: आशा वर्कर्स को स्थायी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और उन्हें एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) का स्थायी हिस्सा बनाया जाए। 3. वेतन बढ़ोतरी: न्यूनतम वेतन ₹26,000 किया जाए। 4. समान कार्य परिस्थितियां: पूरे देश में समान कार्य माहौल और सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। 5. अवकाश सुविधा: 6 माह का सवेतन मातृत्व अवकाश, 20 दिन का आकस्मिक अवकाश और चिकित्सा अवकाश दिया जाए। 6. पदोन्नति: वरिष्ठता के आधार पर आशा वर्कर्स को अन्य पदों पर पदोन्नति दी जाए। 7. विश्राम कक्ष: सभी पीएचसी/सीएचसी और अस्पतालों में ‘आशा विश्राम कक्ष’ बनाए जाएं। 8. यात्रा सुविधा: आशा वर्कर्स को स्कूटर दिया जाए और ड्यूटी के लिए यात्रा भत्ता प्रदान किया जाए। 9. डिजिटलीकरण के लिए संसाधन: उच्च गुणवत्ता वाले टैबलेट, डेटा पैक, नेटवर्क और प्रशिक्षण उपलब्ध करवाया जाए। 10. ऑनलाइन कार्यों का इंसेंटिव: डिजिटल कार्यों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाए। 11. निजीकरण पर रोक: सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पतालों के निजीकरण को रोका जाए। 12. श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए: आशा वर्कर्स को श्रम कानूनों के दायरे में लाया जाए।

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