भारत से अमेरिका में निर्यात होने वाली वस्तुओं पर बुधवार से लागू होने वाले अमेरिकी टैरिफ में 50 प्रतिशत शुल्क बढ़ गया है। शुल्क से जिले के झींगा मछली उत्पादक किसानों पर भारी असर पड़ने लगा है। इससे मछली की कीमतों पर 50 रुपये प्रति किलो तक की कमी आई है। किसानों के लिए अब बचत निकाल पाना मुश्किल हो गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत से अमेरिका में आयात होने वाली वस्तुओं पर एक अगस्त से 25 प्रतिशत टैरिफ लागू किया था, जिसके बाद बुधवार से इस शुल्क को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। इससे झींगा मछली की कीमत प्रति किलोग्राम पर 425 से घटकर 365 प्रति किलोग्राम तक हो गया है। ऐसे में मछली उत्पादकों की आय पर करीब 15 प्रतिशत का असर पड़ा है। 30 से ज्यादा मछली उत्पादक जिले में छोटे बड़े कुल 30 मछली उत्पादक है। इसमें से गांव ठुइंया और खैराती खेड़ा में बड़े स्तर पर झींगा मछली का उत्पादन होता है। मछली उत्पादक कुलदीप तंवर व काका सिंह ने बताया कि झींगा मछली के उत्पादन में प्रति यूनिट 7 लाख तक का खर्च आता है। वहीं हर रोज बिजली व फीड का खर्च अलग से होता है। झींगा मछली का एक चक्कर चार महीने में पूरा होता है। ऐसे में चार माह तक प्रति दिन 5 से 7 हजार रुपये खर्च करने होते है। अमेरिकी टैरिफ बढ़ने के बाद अब मछली उत्पादकों के लिए बचत निकाल पाना मुश्किल हो रहा है। सरकार को मछली उत्पादकों के मुआवजा जारी करना चाहिए ताकि वह आगे भी अपने काम को जारी रख सके। जिले से इन राज्यों में होता है मछली का निर्यात क्षेत्र से मछली का उत्पादन कोलकाता, दिल्ली गाजीपुर मंडी, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में निर्यात किया जाता है। जहां से अमेरिका कंपनियां झींगा मछलियों की खरीद करती है। भारत में झींगा मछली का उत्पादन खपत से अधिक होता है। ऐसे में उसका निर्यात अमेरिका में होता है। मैं पिछले चार वर्षो से झींगा मछली का उत्पादन की रहा है। झींगा मछली के उत्पादन से किसान अच्छा मुनाफा कमा सकता है। अगर इसका भाव 450 रुपये प्रति किलो तक रहे। मौके पर चल रहे भाव से 360 रुपये प्रति किलो के भाव से खर्च निकालना भी चुनौती बन गया है। ऐसे में सरकार को मछली उत्पादकों की आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए। कुलदीप तंवर झींगा मछली उत्पादक झींगा मछली के उत्पादन पर पुरुष को 40 फीसदी और महिला को 60 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है। वहीं 24 घंटे बिजली का कनेक्शन और बिजली की दरों में छूट जा रही है। -राजेंद्र, ए्रग्रीकल्चर, फील्ड ऑफीसर, मत्सय विभाग, फतेहाबाद।