तिगड़ाना। देश की आजादी से पहले संयुक्त पंजाब प्रांत के हिसार जिला के भिवानी में गांव तिगड़ाना में सन 1892 विक्रमी संवत 1949 में एक बाबा ने आकर डेरा डाला था। भिवानी से मात्र सात किलोमीटर दूर गांव तिगड़ाना में आकर डेरा डालने वाले बाबा का नाम दूर-दूर तक प्रसिद्ध हुआ। बाबा के चमत्काराें से प्रभावित लोग उन्हें परमहंस बाबा लटाधारी के नाम से जानने लगे। इनको लोग छौंरा वाला तिगड़ानिया बाबा के नाम से भी जानते है। परम योगी बाबा लटाधारी के जन्मस्थान और आयु माता-पिता कुल वंश के बारे में कही कोई वृतांत नहीं मिलता है। लेकिन कहा जाता है कि बाबा राजस्थान में जन्में थे और बारह वर्ष की अल्पायु में संन्यास ले लिया था। इसके उपरांत उन्होंने हिमालय में योग अवस्था में घोर तपस्या करके भगवान शंकर को प्रसन्न कर लिया। जिससे उन्हें लोक कल्याण की शक्ति प्राप्त हुई। वे अधोरी सरभंगी संत थे। तिगड़ाना में उन्हें लाकर बसाने में ब्रह्मनन्द तथा फुल सिहं भांजा सावंड़िया की भूमिका बतायी जाती है। ईस्वी सन 1896 विक्रमी सवंत 1953 में जब यहां अकाल पड़ा तब इस इलाके में लगातार 15 दिन तक बरसात करवा कर उन्होंने यहां के लोगो को राहत प्रदान की।