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भिवानी: वर्ष 1890 में बसा था गांव शेरपुरा, जानें क्या है गांव का इतिहास

उपमंडल का गांव शेरपुरा साहस, एकजुटता और प्रगतिशील सोच का जीवंत उदाहरण है। स्वच्छता, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण में पूरे क्षेत्र के लिए मिसाल बन गया है। कहा जाता है कि असामाजिक तत्वों को रोककर लूटा हुआ सामान पीड़ितों को दिलाने पर गांव के लोगों को शेरदिल (बहादुर) कहा जाता था तो बाद में बदलकर शेरपुरा हो गया। जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर और सिवानी उपमंडल से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव की नींव वर्ष 1890 में बख्तावरपुरा से आए पेमाराम झांझड़िया और गांव मोहिला से पिलानिया गोत्र के लोगों ने झोपड़ियां बनाकर रखी थीं। करीब 1500 की आबादी और 650 मतदाताओं वाले इस गांव ने स्वच्छता, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। मुख्य रूप से कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था में गेहूं, सरसों, चना और मूंग की भरपूर पैदावार किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाती है। सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर राजबीर सिंह पिलानिया की प्रेरणा से कई ग्रामीण सेना में सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में अमित कुमार, अतुल कुमार और राहुल कुमार सेना सेना सेे जुड़कर देशसेवा का फर्ज निभा रहे हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश गए मोनिक्षा, अर्जुन, पूजा, अंकिता और सोनू पिलानिया भी गांव के युवाओं के लिए नजीर हैं। गांव में हर शुभ अवसर पर पौधरोपण किया जाता है। पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, व्यायामशाला और प्राचीन मंदिर जैसे दादा भोमिया व बालाजी भगवान के मंदिर यहां की आस्था और विकास का केंद्र हैं।

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