शिकोहपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र मेंं सोमवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद़ के सहयोग से मिलेट्स के मूल्य संवर्धन पर 5 दिवसीय कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। इसमें स्वयं सहायता समूहों और हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं मोटे अनाजों से विविध उत्पाद बनाना सीखेंगी। ग्रामीण आजीविका मिशन की प्रोजेक्ट मैनेजर दिप्ती ढ़ीढसा ने बताया कि यह प्रशिक्षण 31 जुलाई तक चलेगा। प्रशिक्ष्ण के बाद महिलाएं छोटे उद्योगों के माध्यम से मिलेट्स के प्रयोग से लघु उद्योग स्थापित करेंगी। प्रशिक्षण के दौरान स्वयं सहायता समूह आंदोलन की शक्ति, सामूहिकता, वित्तीय सशक्तिकरण और स्वरोज़गार के अवसरों पर विस्तार से संवाद किया गया। महिलाओं को यह भी बताया गया कि किस प्रकार एसएचजी से जुड़कर वे आत्मनिर्भर बन सकती हैं, अपनी आय में वृद्धि कर सकती हैं और अपने परिवार और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की भागीदार बन सकती हैं। प्रशिक्षकों ने उम्मीद जताई है कि यह प्रशिक्षण महिलाओं को सीखने से कमाने की दिशा में प्रेरित करेगा और गुरुग्राम जिले में महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की नई सफल कहानियों का आधार बनेगा। यह शिकोहपुर कृषि विज्ञान केंद्र और हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का संयुक्त प्रयास है। इसके पहले इस तरह केे प्रशिक्षण के बाद कई महिलाओं और समूहों ने उद्यमिता के सफल उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। शिकोहपुर कृषि विज्ञान केंद्र की विभागाध्यक्ष डॉ कविता बिष्ट ने बताया कि कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षुओं को मिलेट्स (मोटे अनाज, ज्वार, बाजरा, रागी आदि ) से बिस्किट, केक, मफीन, नान खटाई, इडली-डोसा, नमकीन और लड्डू बनाया जाना सिखाया जाएगा।