खाड़ी में जारी युद्ध के असर के चलते औद्योगिक क्षेत्र मानेसर में गैस सिलिंडर की बढ़ती कीमत और कमी का असर अब साफ दिखने लगा है। खासकर रेहड़ी-पटरी वालों और ढाबा चालकों पर इसका सीधा असर पड़ा है। गैस की कमी के कारण कई ढाबा चालक अब तंदूर का इस्तेमाल करने लगे हैं। कुछ रेहड़ी वाले तो काम छोड़कर अपने गांव लौटने लगे हैं, क्योंकि गैस सिलिंडर उपलब्ध नहीं हो रहे और महंगाई बढ़ रही है। गैस की बढ़ती कीमतों के कारण ढाबा चालकों ने चाय और अन्य खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ा दी हैं। औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग अक्सर रेहड़ी से ही खाना पीना खरीदते हैं। अब गैस की कमी और महंगाई के चलते उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या से न सिर्फ रेहड़ी-पटरी वाले प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि काम करने वाले लोगों के लिए खाने-पीने का खर्च भी बढ़ गया है।