गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। दो दिनों के भीतर एक 12 साल की बच्ची और एक युवक की मौत गलत इलाज से हो चुकी है, इसके बावजूद ये फर्जी डॉक्टर बेखौफ लोगों का इलाज कर रहे हैं। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में किराने की दुकानों, मेडिकल स्टोर्स और घरों में ही “दवाखाना” खोलकर झोलाछाप डॉक्टर भोलेभाले ग्रामीणों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। ग्रामीणों को इंजेक्शन, चाइनीज दवाइयां और एच-शेड्यूल की गोलियां तक बिना मापदंड के दी जा रही हैं। पहला मामला सिलपहरी गांव का है, जहां 12 वर्षीय खुशबू वाकरे की इलाज के दौरान झोलाछाप डॉक्टर भगवानदास (निवासी पीपलामार) के हाथों मौत हो गई। बच्ची की हालत बिगड़ने पर परिजन जिला अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। दूसरा मामला धनगवा गांव का है, जहां 27 वर्षीय पहलवान सिंह की टाइफाइड के इलाज के दौरान मौत हो गई। उसका इलाज गांव के झोलाछाप डॉक्टर संजू पाठक कर रहा था। इन मौतों के बावजूद प्रशासन अब तक कार्रवाई से दूर है। क्षेत्र में बम्हनी गांव के धरम पैकरा किराने की दुकान की आड़ में इलाज कर रहा है, तो बकौली पारा के गोपाल उरांव खुद को “चाइल्ड स्पेशलिस्ट” बताकर बच्चों का इलाज कर रहे हैं। वहीं जोगीसार के राम भुवन घर में अंग्रेजी दवाइयों से मरीजों का इलाज कर रहे हैं।