गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में नियमितीकरण सहित आठ सूत्रीय मांगों को लेकर जीपीएम जिले की लगभग 1620 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं दो दिवसीय हड़ताल पर बैठ गई हैं। हड़ताल के चलते जिले के करीब 800 आंगनबाड़ी केंद्रों में ताला लटक गया है, जिससे महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं का संचालन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। बच्चों को मिलने वाला पूरक पोषण आहार, गर्भवती एवं धात्री माताओं से जुड़ी सेवाएं तथा अन्य गतिविधियां ठप पड़ गई हैं।
साय सरकार द्वारा हाल ही में प्रस्तुत बजट में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के नियमितीकरण या वेतन वृद्धि को लेकर कोई घोषणा नहीं किए जाने से उनमें गहरा आक्रोश है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन निराशा हाथ लगी। इसी के विरोध में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता धरना स्थल पर एकत्रित हुईं और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरने में लगभग 1500 कार्यकर्ताओं की मौजूदगी बताई जा रही है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे कई वर्षों से नियमितीकरण की मांग कर रही हैं। पूर्व में भूपेश सरकार के कार्यकाल में 43 दिनों तक चली हड़ताल के बाद कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में क्रमशः 3500 और 1750 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी तथा शासकीयकरण का आश्वासन दिया गया था। भाजपा के घोषणा पत्र में भी नियमितीकरण का वादा किया गया था, जिसे अब तक पूरा नहीं किया गया है।
धरना स्थल से कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगामी 9 मार्च से रायपुर में प्रदेश स्तरीय अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे अपने हक की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखेंगी। हड़ताल के कारण जिलेभर में आमजन, विशेषकर बच्चों और महिलाओं को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जबकि आंदोलनरत कार्यकर्ता अपनी मांगों पर अडिग हैं।