छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में पथर्रा गांव में करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से एक निजी कंपनी द्वारा एथेनॉल प्लांट लगाया गया है। ये प्लांट वर्तमान में प्रारंभ हो गया है। लेकिन, यह प्लांट जब से शुरू हुआ है, तब से इसका विरोध क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा किया जा रहा है। यहां ग्रामीणों द्वारा बीते 120 दिनों से लगातार धरना दिया जा रहा है। आज गुरुवार को यहां ग्रामीणों को समझाइश देने पुलिस-प्रशासन की टीम पहुंची हुई है। यहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए है। आज शाम चार बजे तक समझाइश का सिलसिला जारी रहा। दरअसल, यहां के ग्रामीणों का कहना हैं कि इस प्लांट से प्रदूषण फैलेगा और उनकी खेतों की उपज पर भी असर पड़ेगा। हालांकि, कंपनी प्रबंधन ने दावा किया है कि प्लांट से किसी भी प्रकार से प्रदूषण नहीं फैलेगा और न ही किसी भी खेत के उपज पर असर पड़ेगा। दूसरी ओर धरने पर बैठे ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट के विरोध करने के कारण लगातार पुलिस-प्रशासन व प्लांट प्रबंधक द्वारा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रहीं है। एक बार इसके विरोध में शांतिपूर्ण बेमेतरा कलेक्ट्रेट का घेराव किया गया था, तब प्रशासन ने ग्रामीणों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। इसी साल जनवरी माह में ही प्लांट प्रबंधन की ओर से ग्रामीणों के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई है। जिसमें कई महिलाओं का नाम शामिल है। वहीं, जब यहां के ग्रामीण पुलिस के पास प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे व लिखित में आवेदन देने के बाद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बता दे कि दो दिन पहले ही यहां के ग्रामीणों ने एथेनॉल प्लांट के विरोध में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बहिष्कार कर दिए है। इस संबंध में ग्रामीणों ने बकायदा कलेक्टर को आवेदन भी दिए है।