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बदहाल शिक्षा व्यवस्था: बालोद में शिक्षक की कमी पर भड़के पालक, स्कूल में जड़ा ताला

Thu, 25 Jun 2026 04:05 PM IST
बालोद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बालोद

आदिवासी विकासखंड डौंडी के अंतर्गत आने वाले ग्राम मलकुवर में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। ग्राम मलकुवर के प्राथमिक शाला में शिक्षकों की भारी कमी से नाराज पालकों और ग्रामीणों ने गुरुवार को स्कूल खुलने से पहले ही मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। ग्रामीण यहीं नहीं रुके, उन्होंने स्कूल के ठीक सामने टेंट गाड़ दिया और तख्ती-बैनर लेकर धरने पर बैठ गए। प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। लगभग दो घंटे तक चले इस हंगामे के बाद मौके पर पहुंचे शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने आनन-फानन में पास के स्कूल से एक शिक्षक की वैकल्पिक व्यवस्था की, जिसके बाद ग्रामीणों ने ताला खोला।

32 बच्चों पर सिर्फ एक शिक्षक, प्रधान पाठक 4 साल से बीमार
ग्रामीणों का आरोप है कि मलकुवर प्राथमिक शाला में कुल 32 बच्चे दर्ज हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए केवल एक ही शिक्षक तैनात है। स्कूल में पदस्थ प्रधान पाठक पिछले 4 वर्षों से गंभीर रूप से अस्वस्थ चल रहे हैं, जिसके कारण वे लंबे समय से स्कूल नहीं आ पा रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण रोमन लाल सहारे ने बताया, एक शिक्षक के भरोसे 32 बच्चों और पांच क्लास को संभालना मुमकिन नहीं है। हमारे बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है। अधिकारियों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। मजबूरी में हमें यह कदम उठाना पड़ा।

बीईओ और तहसीलदार ने संभाला मोर्चा
तालाबंदी और उग्र प्रदर्शन की सूचना मिलते ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) प्रवीण चतुर्वेदी और तहसीलदार देवेंद्र नेताम दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण स्थाई शिक्षक की मांग पर अड़े रहे। माहौल बिगड़ता देख बीईओ ने तुरंत प्रशासनिक पावर का इस्तेमाल करते हुए पास के ही हाई स्कूल नर्राटोला से एक शिक्षक को व्यवस्था के तौर पर मलकुवर स्कूल के लिए अटैच किया। इस त्वरित कार्रवाई और लिखित आश्वासन के बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ और करीब दो घंटे बाद स्कूल का ताला खोला जा सका, जिसके बाद बच्चे कक्षाओं में दाखिल हुए।

ब्लॉक में 'कोकाण' स्कूल का मामला बना चर्चा का विषय
ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने शिक्षा विभाग के दोहरे मापदंड को लेकर भी तीखे सवाल दागे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एक तरफ मलकुवर और कांडे जैसे स्कूलों में बच्चे शिक्षकों के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कोकाण प्राथमिक शाला में महज 19 बच्चों को पढ़ाने के लिए 3 शिक्षक तैनात हैं।

कलेक्टर के आदेश को भी ठेंगा
ग्रामीणों ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि कोकाण स्कूल की एक शिक्षिका का स्थानांतरण स्वयं कलेक्टर मैडम के अनुमोदन के बाद दूसरे अभावग्रस्त स्कूल में किया गया था। लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने रसूख के चलते उस शिक्षिका को आज तक रिलीव (कार्यमुक्त) नहीं किया है। यही वजह है कि जब भी ब्लॉक के किसी स्कूल में तालाबंदी होती है, तो कोकाण स्कूल का यह वीआईपी मामला जरूर गूंजता है।

एक सप्ताह में दूसरी तालाबंदी से खुली दावों की पोल
डौंडी ब्लॉक में यह कोई पहला मामला नहीं है। महज एक सप्ताह पहले प्राथमिक शाला कांडे में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला था। वहां 93 बच्चों को पढ़ाने के लिए सिर्फ 2 शिक्षक थे, जिसके विरोध में पालकों ने स्कूल बंद कर दिया था। वहां भी अधिकारियों ने मौके पर जाकर जैसे-तैसे एक टीचर की व्यवस्था की थी। एक के बाद एक हो रही इन घटनाओं ने जिले में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के प्रशासनिक दावों की पोल खोल कर रख दी है। स्कूल में जड़ा तला- फोटो : credit   स्कूल में जड़ा तला- फोटो : credit   स्कूल में जड़ा तला- फोटो : credit  

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