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Ambikapur: बॉक्साइट खदान पर जनसुनवाई में भारी विरोध, ग्रामीण बोले- पर्यावरण और जल स्रोतों के लिए गंभीर खतरा

Wed, 01 Jul 2026 06:26 PM IST
अंबिकापुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर

सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान परियोजना को लेकर बुधवार को कमलेश्वरपुर-केसरा में आयोजित जनसुनवाई विरोध और हंगामे के बीच संपन्न हुई। जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों, तिब्बती समाज के प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों ने परियोजना का विरोध करते हुए इसे पर्यावरण, जल स्रोतों और स्थानीय लोगों की आजीविका के लिए गंभीर खतरा बताया। प्रदर्शनकारियों ने शासन से प्रस्तावित खदान परियोजना को तत्काल निरस्त करने की मांग की।

जनसुनवाई शुरू होते ही ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए परियोजना के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि मैनपाट क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, घने जंगलों और जल स्रोतों से समृद्ध है। यहां बड़े पैमाने पर खनन होने से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ेगा और क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि खनन गतिविधियों से खेती, पशुपालन और स्थानीय लोगों की आजीविका भी प्रभावित होगी।

तिब्बती समाज के प्रतिनिधियों ने भी जनसुनवाई में अपनी आपत्तियां विस्तार से रखीं। उन्होंने कहा कि पुनर्वास के दौरान उन्हें जो भूमि आवंटित की गई थी, उसी पर उनकी आजीविका और धार्मिक आस्था दोनों आधारित हैं। प्रतिनिधियों के अनुसार प्रस्तावित 145.8 हेक्टेयर खदान क्षेत्र में लगभग 50.3 हेक्टेयर भूमि तिब्बती समुदाय के कब्जे में है, जहां उनका धार्मिक स्थल और मंदिर भी स्थित है। उनका कहना था कि यदि खनन परियोजना शुरू होती है तो समुदाय के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो जाएगा और उनकी सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान भी प्रभावित होगी।

जनसुनवाई के दौरान पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) रिपोर्ट को लेकर भी कई सवाल उठाए गए। केसरा ग्राम पंचायत के सरपंच ने आरोप लगाया कि रिपोर्ट प्राप्ति की पावती पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें नियमानुसार दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। वहीं रोपाखार और कमलेश्वरपुर के सरपंचों ने भी दावा किया कि पर्यावरणीय रिपोर्ट समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे ग्रामीणों को अध्ययन और आपत्तियां तैयार करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।

अधिवक्ता राजेश गुप्ता ने भी जनसुनवाई में हिस्सा लेते हुए पर्यावरण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जनसुनवाई की प्रक्रिया में पर्यावरण संबंधी नियमों और प्रावधानों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि सभी आपत्तियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और नियमों का पालन सुनिश्चित किए बिना परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जाए।

इस दौरान सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो भी जनसुनवाई में पहुंचे और ग्रामीणों के आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि किसी भी विकास परियोजना में स्थानीय लोगों की सहमति सर्वोपरि होनी चाहिए। यदि ग्रामीण और प्रभावित समुदाय परियोजना का विरोध कर रहे हैं तो उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। विधायक ने कहा कि स्थानीय लोगों की सहमति के बिना बॉक्साइट खदान परियोजना को आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।

पूरी जनसुनवाई के दौरान विरोध, नारेबाजी और आपत्तियों का सिलसिला जारी रहा। बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीणों ने हाथों में तख्तियां लेकर परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन किया और पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई। प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों की आपत्तियां दर्ज करते हुए उन्हें नियमानुसार आगे भेजने का भरोसा दिलाया।

मैनपाट में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान परियोजना को लेकर लंबे समय से स्थानीय स्तर पर विरोध की स्थिति बनी हुई है। जनसुनवाई में जिस तरह ग्रामीणों और तिब्बती समाज ने एकजुट होकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं, उससे स्पष्ट है कि परियोजना को लेकर क्षेत्र में व्यापक असंतोष बना हुआ है। अब सभी की निगाहें शासन और संबंधित विभागों के अगले निर्णय पर टिकी हैं।

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